अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों ने दिया धरना

उत्तर प्रदेशअशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों ने दिया धरना

Date:


अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों ने दिया धरना

सामूहिक अवकाश लेकर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर धरने पर बैठे शिक्षक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की मांगों पर कार्रवाई कराने की मांग

लखनऊ। उ0प्र0 के समस्त अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों की अनेक समस्यायें एवं मांगे काफी समय से लम्बित हैं। इन समस्याओं और मांगों के सम्बन्ध में संगठन द्वारा अनेक बार सरकार एवं शासन से वार्ता कर निराकरण कराने हेतु प्रयास किये गये। लेकिन समस्याओं का निराकरण न होने पर दिनांक 19 सितम्बर 21 को प्रदेश कार्यकारणी की वृंदावन में आहूत बैठक में दिनांक 5 अक्टूबर 21 को सामूहिक अवकाश के साथ विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर धरना देने का निर्णय लिया गया। प्रदेश कार्यकारणी के निर्णय के अनुसार आज दिनांक 5 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के समस्त अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षक साथी सामूहिक अवकाश पर रहते हुए अपनी निम्नलिखित मांगों के समर्थन में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर धरने पर बैठे।

डॉ मनोज पांडेय अध्यक्ष लुआक्टा तथा डा अंशु केडिया महामंत्री, लुआक्टा की ओर से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन प्रेषित किया गया। उक्त ज्ञापन के माध्यम से सीएम से की गयी प्रदेश के उच्च शिक्षा के शिक्षको की प्रमुख मांगे निम्नलिखित है।

1–.पुरानी पेंशन को बहाल किया जाय तथा दिनांक 01 अप्रैल, 2005 व उसके पश्चात नियुक्त शिक्षकों को पुरानी पेन्शन योजना से आच्छादित किया जाये। फिलहाल नई पेन्शन योजना में शिक्षकों के वेतन से कटौती की जा रही है लेकिन सरकारी अंशदान विलम्ब से प्राप्त होता है। जिससे शिक्षकों को नई पेंशम योजना में भी आर्थिक नुकसान हो रहा है। अतः सरकारी अंशदान को समय से मुक्त किया जाये।

2–.प्रदेश के सभी शिक्षको को प्रोफेसर पदनाम एवं प्रोफेसर ग्रेड पे प्रदान किया जाय, तथा शासनादेश निर्गत होने की तिथि तक के समस्त ऐसोसिट प्रोफेसर को तीन वर्ष पूर्ण करने पर स्वतः प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति की जाय
3–केंद्रीय विश्वविद्यालयों की भांति उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा के शिक्षको की सेवा निवृत्त की आयु 65 वर्ष किया जाये।

4–आमेलन से शेष बचे मानदेय शिक्षकों एव उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग से चयनित अभ्यर्थियों के पद भार ग्रहण करने के कारण हटाये गये मानदेय शिक्षको तथा जिन संस्थानों को मानदेय नियुक्ति के बाद अल्पसंख्यक मान्यता प्राप्त हुई उन संस्थानों में अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त होने से पूर्व कार्यरत मानदेय शिक्षकों का आमेलन अविलम्ब किया जाये एवं मानदेय के रूप में कई गयी सेवा को जोड़कर प्रोन्नति का लाभ प्रदान किया जाये।

5–उत्तर प्रदेश के अनुदानित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित योजना में कार्यरत शिक्षको,एव स्ववित्तपोषित योजना शुरू होने से पूर्व समस्त औपचारिकताओ को पूर्ण कर चुके लखनऊ के अमीरूदौला इस्लामिया एवं कालीचरण पी जी कॉलेज के वाणिज्य विभाग को तत्काल अनुदान सूची पर लिया जाये।

6–आकस्मिक अवकाशों की संख्या 8 से बढ़ाकर 14 किया जाय,तथा चिकित्सीय अवकाश का अलग से प्रावधान किया जाये।

7–वेतन निर्धारण से शेष बचे पुस्तकालय कैडर के साथियो का वेतन निर्धारण सातवें वेतनमान में अविलम्ब किया जाये तथा इनके अवशेष राशि का भुगतान यथाशीघ्र किया जाए, एव लम्बे समय से रिक्त लाइब्रेरियन के पदो पर नियुक्ति की जाये।

8- पी एच डी की योग्यता धारित करने वाले शिक्षको को शासनादेश संख्या 1214/सत्तर-1-2000-36/ 2000 दिनांक 25 जुलाई 2002 की भांति पुनः फीडर कैडर का लाभ प्रदान किया जाय ।

9–पी एच डी की अहर्ता न धारित करने वाले शिक्षको को कैरियर एडवांसमेंट योजना के अंतर्गत एससोसिट प्रोफेसर पर प्रोन्नति की जाये।

10–महाविद्यालय शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की भांति कैशलेस चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध करायी जाये।

11–आकस्मिक निधन की स्थिति में डेथ कम ग्रेच्युटी,तथा दिवंगत शिक्षक के परिवार को मृतक आश्रित सेवा योजन में यदि आश्रित शिक्षक पद की योग्यता धारित करता है तो असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति प्रदान की जाये।

12-पी0एच0डी0 के पांच एव और एम0फिल0 की तीन वेतन वृद्धि (Increment) यू0जी0सी0 रेगुलेशन के अनुसार दिए जाये ।

13–ओरिएंटेशन एव रिफ्रेशर में छूट 2018 के स्थान पर 31 दिसम्बर 2021 किया जाये ।

14-सामूहिक जीवन बीमा योजना की धनराशि की कटौती 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष तक किया जाये ।

15–सरकारी कर्मचारी, माध्यमिक शिक्षक एवं बेसिक शिक्षा में कार्यरत शिक्षकों में पति-पत्नी की सेवाकाल में मृत्यु होने पर पति या पत्नी को पारिवारिक पेन्शन प्राप्त होती है। इन दोनों की मृत्यु होने पर पति या पत्नी को पारिवारिक पेन्शन प्राप्त होती है। इन दोनों की मृत्यु हो जाने पर उनके दिव्यांग पुत्र या पुत्री को भी पारिवारिक पेन्शन प्राप्त होती है एवं यह पारिवारिक पेन्शन दिव्यांग पुत्री को उसके विवाह उपरान्त भी प्राप्त होती रहती है। उच्च शिक्षा में भी इस व्यवस्था को अविलम्ब लागू किया जाये।

16-छठें वेतनमान की संस्तुति के अनुसार 62 वर्ष पर सेवानिवृत्त शिक्षकों को ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण एवं पी0एच0डी0 वेतन वृद्धि का लाभ अनुमन्य किया जाये।

17-.5 सितम्बर 2021 को निर्गत यू जी शिक्षको के शोध पर्यवेक्षण के सम्बंध में जारी शासनादेश में 5 शोधपत्रों के स्थान पर यू जी सी शोध नियमन के अनुसार 2 शोधपत्रों का प्रविधान किया जाय,एव शिक्षको के पी एच डी प्रवेश हेतु यू जी सी नियमन 2018 के अनुसार 10ः का आरक्षण का शासनादेश निर्गत किया जाय ।

18-राज्य पुरस्कार के सरस्वती और शिक्षक श्री में महाविद्यालयों के शिक्षकों के लिए पुरस्कारों की संख्या बढ़ाई जाए ।

19-वर्ष 2000 के बाद जो महाविद्यालय अल्पसंख्यक घोषित हुए हैं उन महाविद्यालयों के अल्पसंख्यक घोषित होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को एकल स्थानांतरण की सुविधा अनुमन्य किया जाये।

20– एकल स्थानांतरण की सुविधा संपूर्ण सेवाकाल में दो बार अनुमन्य की जाए। एकल स्थानांतरण हेतु ‘NOC‘‘ की व्यवस्था समाप्त कर केवल ‘‘NO Dues‘‘ प्रमाण पत्र के आधार पर स्थानांतरण किया जाये। माध्यमिक शिक्षकों के एकल स्थानान्तरण हेतु लागू नियमावली डिग्री शिक्षकों के लिए भी लागू की जाए।

21-.प्रदेश में विनियमतीकरण से वंचित तदर्थ शिक्षकों के विनियमतीकरण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाये।

22–स्ववित्तपोषित योजना के शिक्षको के लिए सी पी एफ खाता खोलने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए 23–प्रबंधतंत्रो में शिक्षको की भागीदारी 50 प्रतिशत किया जाये।

24–छुट्टियों की कटौती के सम्बंध में जारी विसंगतपूर्ण शासनादेश को निरस्त किया जाये।

25-उच्च शिक्षा विभाग में भी सिटीजन चार्टर लागू किया जाये।

26-.महाविद्यालयों में विगत अनेक वर्षों से तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति पर सरकार द्वारा प्रतिबन्ध लगाया गया है। वर्तमान में लगभग एक तिहाई कर्मचारी ही सेवारत् हैं। परिणाम रूवरूप महाविद्यालयों में इस श्रेणी के कर्मचारियों के न होने के कारण कार्य एवं प्रगति प्रभावित हो रही है। अतः आवश्यक है कि महाविद्यालयों में रिक्त स्वीकृत पदों के सापेक्ष तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्ति प्राथमिकता के आधार पर की जाये।

27-.सातवें वेतनमान की संस्तुतियों के क्रम में मकान किराया भत्ता तथा नगर प्रतिकर भत्ता प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालयों की भांति दिया जाये।

28-एकेडमिक काउंसिल, बोर्ड ऑफ स्टडीज एव फेकल्टी बोर्ड में महाविद्यालयों के शिक्षको को उनकी संख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व दिया जाये।

29-कार्यपरिषद मे लुआक्टा अध्यक्ष एव महामंत्री को पदेन सदस्य बनाया जाये।

30-शिक्षकों की समस्याओं के निराकरण हेतु “Grievance Redressal Committeeका गठन किया जाए।

31- लखनऊ विश्वविद्यालय की समस्त कमेटियों में 80 : 20 के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाये।

32–सी डी सी में महाविद्यालयों के शिक्षकों को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाये।

33–सी बी सी एस को तर्कसंगत बनाया जाये।

उपरोक्त मांगों में अनेकों मांगें ऐसी है जिनमें सरकार पर कोई विशेष वित्तीय भार भी नहीं निहित होने वाला है। सरकार और शासन का सकारात्मक दृष्टिकोण ना होने के कारण उपरोक्त मांगें अभी तक लम्बित हैं। संगठन का मानना है कि सरकार के सर्वाेच्च स्तर से उपरोक्त सभी मांगों पर सकारात्मक वार्ता की आवश्यकता है।
दिये गये ज्ञापन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियाँ रिकार्ड समय पर लागू कर वेतन व अवशेष का भुगतान कराये जाने एवं मानदेय शिक्षकों के आमेलन,यू जी शिक्षको को शोध का अधिकार ,28 मई 2015 तक पुराने नियमों में रीडर/चयन वेतनमान पर प्रोन्नति पाये शिक्षको को स्वतः पे बैंड 4 प्रदान करना ,ओरिएंटेशन एव रिफ्रेशर के कारण प्रोन्नति से वंचित होने वाले शिक्षको के लिए कट ऑफ डेट 31 दिसम्बर 2017 ,पति पत्नी दोनों के सेवारत होने पर मकान किराया भत्ता दोनों को प्रदान करने हेतु आभार प्रकट करते हुए आशा की गयी की उपयुक्त मांगों के निस्तारण हेतु त्वरित कार्यवाही की जाये।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related