20 मई World Bee Day स्पेशल
एक कॉलोनी में पचास से साठ हजार मधु मक्खियां, इनमें कुछ अदद नर, कुछ इस कॉलोनी की वर्कर और इन सबके बीच एक रानी। वह रानी, जिसका काम सिर्फ अंडे देना होता है और यह एक दिन में 1500 से 2000 तक अंडे देती है। कॉलोनी में इस क्वीन का राज चलता है। इस बी क्वीन का ना सिर्फ खाना रायल होता है बल्कि यह दिखने में भी दूसरी मधुमक्खियों से अलग होती है। 20 मई को world Bee Day मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 20 मई की तारीक को इसलिए चुना गया क्योंकि यह दिन अधुनिक मधुमक्खी पालन के प्रणेता एंटोन जानसा का जन्मदिवस होता है, जिनका जन्म 20 मई 1734 में हुआ था। इस खास दिन पर शहर के बी कीपर सितांशु कुमार से हमने मधुमक्खियों की जीवन शैली से लेकर मधु मक्खी पालन के बारे में बात की।

कॉलोनी यानी लकड़ी का एक बॉक्स
वैसे तो मधु मक्खियों के छत्ते बड़े-बड़े पेड़ों पर, घरों की ऊंची छतों पर या फिर कहीं किसी के घर पर भी लगे नजर आते हैं लेकिन बात जब इनके पालन की होती है तो इसके खास इंतेजाम होते है। इनके लिए लकड़ी का एक बॉक्स होता है जिसमें फ्रेम फिट होते हैं। इस बॉक्स में मोम की शीट लगाई जाती है और फिर इसमें 50 से 60 हजार मक्खियों को छोड़ा जाता है। इनमें एक बी क्वीन भी होती है। इस एक बॉक्स को कॉलोनी कहते हैं। यानी अगर किसी के पास ऐसे पांच बॉक्स हैं तो पांच कॉलोनी और अगर 50 हैं तो पचास कॉलोनी।
कभी नहीं भूलतीं अपना घर
इंसान एक बार अपने घर का पता भूल सकता है लेकिन इन मक्खियों में ऐसी खासियत होती है कि यह दिनभर पेड़ों, फूलों पर मंडराने के बाद जब वापस लौटती हैं तो अपनी ही कॉलोनी में जाती है। बगल में रखी दूसरी कॉलोनी में भी नहीं जातीं। साल 2025 में रायबरेली के महाराजगंज में फैबिश नारायण फॉर्म के नाम से मधुमक्खी पालन कर रहे सितांशु कुमार कहते हैं कि इन मक्खियों के साथ रहकर, इनके बारे में गहन अधयन करके इनकी खासियतों के बारे में जाना है। कॉलोनी से निकलकर यह पोलन, नेक्टर जमा करने के लिए जाती हैं। और इनका अधिक्तम उड़ने का दायरा तीन किलोमीटर की रेंज में होता है। खासबात यह है कि जब यह वापस आती हैं तो इनके शरीर में ऐसी तरंगे निकलती है जिनसे यह कभी अपनी कॉलोनी का रास्ता नहीं भूलती। सौ कॉलोनी के बीच भी यह अपने ही घर में जाती हैं।

दो से तीन साल जीती है रानी
एक कॉलोनी में 50 से 60 हजार रहने वाली मक्खियों में एक रानी होती है जिसकी उम्र दो से तीन साल ही होती है। वहीं दिन भर बाहर घूम-घूम कर शहद के स्तोत्र जमा करने वाले वर्कर महज 50 या 60 दिन ही जीते हैं। इनके जो नर होते हैं उनका काम सिर्फ ब्रीडिंग होता है। खास बात यह है कि पूरी कॉलोनी में रूल सिर्फ बी क्वीन का ही चलता है और कॉलोनी की यही क्वीन अंडे देती है और कोई नहीं। एक कॉलोनी में एक ही क्वीन होती है। कई बार ऐसा भी देाा गया है कि एक कॉलोनी में दो रानियां हो जाती हैं तो उनमें से एक को बाहर करना ही पड़ता है वरना कॉलोनी में झगड़ा पैदा हो जाता है। इस क्वीन का खाना भी अलग होता है। वर्कर जो भी लाते हैं उनमें रायल जैली होती है और वह सिर्फ बी क्वीन ही खाती है।
फूल, पेड़ों वाला होना चाहिए ऐरिया
सितांशु कहते हैं कि जहां तक सवाल इनके पालन का है तो पांच कॉलोनियों के साथ भी इस काम को शुरू किया जा सकता है। मैंने भी पांच बॉक्स से ही शुरूआत की थी और आज मेरे पास पच्चीस बॉक्स हैं। एक बॉक्स से हमें 35 से 40 किलो तक शहद मिलता है। हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट इस उद्दोग के लिए ट्रेनिंग के साथ सबसीडी की सुविधा भी देता है। जिस ऐरिया में इनका पालन हो वह ऐरिया फूल, पौधे और पेड़ों वाला होना चाहिए। जामुन, नीम, सहजन, यूकेलिप्टिस, तिलहन, सरसों इनके फॉर्म के पास इन पेड़ों का होना अच्छा होता है।

चल रहा है ऑफ सीजन
वैसे तो इनके मक्खी पालन में खास दिक्कते नहीं हैं लेकिन कुछ सावधानियां बरती ही पड़ती हैं। खासकर ऑफ सीजन में। सितांशु कहते हैं कि मार्च से अगस्त सितंबर तक इनकी काफी देखभाल करनी पड़ती है। इन्हें माइग्रेट भी करना पड़ता है और कुछ खास खान-पान भी रखना पड़ता है। तेज धूप गर्मी इनके लिए नुकसानदेह हो सकती है। ऑक्सीजन का ध्यान रखना पड़ता है। कई बार बीमारी भी आ जाती है।
शहद से बेहतर कुछ नहीं
सौ मधु मक्खी अगर किसी को कांट ले तो इंसान मर भी सकता है लेकिन दो से तीन डंक अगर मधु मक्खी मार दे तो इससे इंसान का इम्यून सिस्टम बेहतर होता है। मधु मक्खी से हमें शहद मिलता है, लेकिन क्या आपको मालूम है कि मधु मक्खी जहर भी देती है और इस जहर का इस्तेमाल दवाओं में होता है। इस बी वेनम की कीमत करोड़ों में होती है। सितांशु कहते हैं कि बी वेनम की कीमत करीब एक करोड़ रुपए किलो तक होती है। इसकी वजह यही है कि इसके निकलना या जमा करना आसान नहीं होता। इसके लिए एक अटैचमेंट कॉलोनी में लगाया जाता है। और उनके डंकों के जरिए यह जमा होता है। अब एक डंक में वह कितनी कम मात्रा में जहर छोड़ती हैं इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। मगर बी वेनम जो जहर जरूर है लेकिन हजारों जिंदगी बचाने वाली दवाओं में इसका इस्तेमाल किया जाता है। मैं करीब एक साल से शहर तैयार कर रहा हूं और लोगों को एकदम असली शहद देता हूं। शहद के अलावा मैंने ड्राईफ्रूट और शहद के साथ एक स्प्रेड भी तैयार किया है। लोगों इन्हें मेरे घर से ले जाते हैं इसके अलावा ऑन लाइन भी सेल है।

