अमित बिश्नोई
हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए कल मतदान ख़त्म होने के बाद परंपरा बन चुके एग्जिट पोल्स के नतीजे आ गए और संकेत दे गए कि 8 अक्टूबर का दिन प्रधानमंत्री मोदी यानि भाजपा के लिए अच्छा साबित नहीं होगा क्योंकि एक तरफ जहाँ उन्हें हरियाणा में 10 साल की हुकूमत के बाद सत्ता गंवानी पड़ती दिख रही वहीँ धारा 370 हटने के बाद और जम्मू कश्मीर के दो टुकड़े करने (लद्दाख अब अलग UT बन गया है) और उससे राज्य का दर्जा छीनने के बाद हुए विधानसभा के पहले चुनाव में अपनी सरकार बनती नहीं दिखाई दे रही है. हरियाणा में जहाँ कांग्रेस एक बड़े मार्जिन से बाज़ी मारती हुई नज़र आ रही है वहीँ जम्मू कश्मीर में भी कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस का गठबंधन सरकार बनाने की बहुत नज़दीक दिखाई दे रहा है. भाजपा के लिए दोनों जगहों पर कांग्रेस के सत्ता में आने की संभावना एक बड़ा झटका कही जाएगी क्योंकि कुछ समय में महाराष्ट्र और झारखण्ड में भी चुनाव होने वाले हैं और भाजपा कतई नहीं चाहती होगी कि कांग्रेस पार्टी जीत के घोड़े पर सवार होकर महाराष्ट्र और झारखण्ड के चुनाव में पहुंचे.
बहरहाल ये एग्जिट पोल्स हैं जो सही भी हो सकते हैं और गलत भी. अनुमानों के काफी नज़दीक भी हो सकते हैं और काफी दूर भी. काफी दूर की जहाँ तक बात है तो उसमें दोनों ही बातें हैं, ये नीचे और ऊपर दोनों तरफ को कवर करते हैं, यानि जो अनुमान हैं उससे काफी नीचे संख्या हो सकती है और अनुमानों से काफी ऊपर भी. दूसरे शब्दों में कहें तो जम्मू कश्मीर में इंडिया गठबंधन अकेले बहुमत की सरकार बना सकती है और हरियाणा में कांग्रेस पार्टी की सुनामी आ सकती है. ये भी हो सकता है कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल नतीजों की तरह हरियाणा और जम्मू- कश्मीर के नतीजे भी उलट जांय। आपको याद होगा कि छत्तीसगढ़ के लिए किसी भी एग्जिट पोल्स में भाजपा की सरकार नहीं बन रही थी लेकिन वहां भारी बहुमत से उसकी सरकार बनी और एग्जिट पोल्स को झूठा और गलत साबित कर दिया, हालाँकि मध्यप्रदेश के बारे में ऐसा नहीं था, वहां पर राय बंटी हुई थी, ज़्यादातर एग्जिट पोल्स में कांटे की टक्कर दिखाई जा रही थी, इसी तरह एक पोल्स्टर ने कांग्रेस और एक ने भाजपा की सरकार बनने का अनुमान लगाया था जो सही साबित हुआ था।
एग्जिट पोल्स का अपना अलग ही फंडा है, जिसके फेवर में होते हैं उसे उसमें कोई खोट नज़र नहीं आती, लेकिन जिसके खिलाफ होते हैं तो उसे वो एग्जिट पोल्स याद आने लगते हैं जो पूर्व में गलत साबित हो चुके हैं. हरियाणा और जम्मू कश्मीर के एग्जिट पोल्स के बारे में भी भाजपा नेताओं को कल से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के एग्जिट पोल्स के नतीजे बहुत याद आ रहे हैं, हालाँकि सच पूछा जाय तो एग्जिट पोल्स का तमाशा तो लोकसभा चुनाव में बना था जब भाजपा को 400 पार दिलाने वाले एग्जिट पोल्स पूरी तरह धराशायी हो गए थे और भाजपा 244 पर आकर ठहर गयी थी और मोदी जी को एक गठबंधन सरकार चलानी पड़ रही है, हालाँकि भाजपा यही दावा करती है कि NDA ने बहुमत की सरकार बनाई है और ये बात सही भी है कि इस बार केंद्र में भाजपा की नहीं NDA की सरकार है. बहरहाल हरियाणा और जम्मू कश्मीर के एग्जिट पोल्स को एक तरह से ठुकराकर छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की याद दिलाने वाले भाजपा नेता लोकसभा चुनाव के धराशायी एग्जिट पोल्स की बात नहीं करते जो कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश विधानसभाओं से बाद की बात है. खैर नेताओं को किसी तरह अपने स्टैंड को डिफेंड तो करना ही होता है और नतीजों से पहले कोई हार को एक्सेप्ट भी नहीं करता, चाहे कोई भी पार्टी हो, उसे नतीजे वाले दिन चमत्कार की गुंजाईश नज़र आती है और कभी कभी ऐसा हो भी जाता है, जैसा की लोकसभा चुनाव में हुआ जब विपक्ष भाजपा के काफी करीब पहुँच गया और कांग्रेस पार्टी के प्रदर्शन में 100 प्रतिशत का सुधार आ गया जिसने मरती हुई कांग्रेस को फिर से ज़िंदा कर दिया, जिसका प्रमाण हरियाणा और जम्मू कश्मीर के एग्जिट पोल्स के अनुमान हैं.
अगर हम लोकसभा चुनाव और हरियाणा के चुनाव के एग्जिट पोल्स के एग्जिट पोल्स की तुलना करें तो काफी समानता दिखाई दे रही है. दोनों ही पोल्स में एकतरफा जीत की भविष्वाणी की गयी है. लोकसभा में जहाँ मेनस्ट्रीम मीडिया द्वारा कराये गए एग्जिट पोल्स में कोई भी भाजपा को 350 से कम नहीं दे रहा था, बल्कि कई पोल्स्टर्स तो मोदी जी के नारे अबकी 400 पार को मूर्त आकार दे रहे थे. इसी तरह इस बार के हरियाणा विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल्स में भी सिर्फ दैनिक भास्कर को छोड़कर सभी पोल्स्टर्स कांग्रेस को पूर्ण बहुमत दे रहे हैं, दैनिक भास्कर ने ज़रूर कांग्रेस को बहुमत के करीब बताया है और उसे 40 से 44 सीटें दे रहा है, यानि औसत की बात करें तो 42 सीटें, मतलब बहुमत से चार सीटें कम. लेकिन शेष पोल्स्टर्स अपनी अपर लिमिट में कांग्रेस पार्टी को 65 तक भी पहुंचा रहे हैं. ये समानता सिर्फ अभी तक है जो बदल भी सकती है, यानि अगर ये अनुमान सही साबित हुए तो. दोनों एग्जिट पोल्स की अगर बात करें तो एक अंतर स्पष्ट नज़र आता है, लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल्स आने के बाद चारों तरफ से एक शोर उठा था कि ये फेक या मैनीपुलेटेड एग्जिट पोल्स हैं लेकिन हरियाणा या जम्मू कश्मीर के एग्जिट पोल्स आने के बाद इस तरह की कोई बात नहीं की जा रही है, भाजपा नेताओं द्वारा भी, वो एग्जिट पोल्स पर सवाल तो उठा रहे हैं लेकिन उसे फेक या मैनीपुलेटेड नहीं बोल रहे हैं और सभी का यही कहना कि 8 अक्टूबर को नतीजे अलग आएंगे, उन्हें ये कहना भी चाहिए और ये उनका अधिकार भी है. आखिरकार ये अनुमान ही तो हैं, नतीजे तो नहीं। यहाँ मैं इस नोट पर अपनी बात को ख़त्म करूंगा, एक बहुत सीनियर पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक ने एक बड़ी अच्छी बात कही, उन्होंने कहा कि ये डर और खौफ वाला एग्जिट पोल है, अब आप उनकी इस बात का अपनी तरह से मतलब निकाल सकते हैं.

