थायरॉइड का महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है? जानिए

हेल्थथायरॉइड का महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है? जानिए

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आजकल महिलाओं में हार्मोन से जुड़ी कई तरह की परेशानियां बढ़ गई हैं। इनमें पीसीओडी और थायरॉइड शामिल हैं। थायरॉइड ग्रंथि का सुस्त या अधिक सक्रिय होना स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखी जाती है। वजन बढ़ने, गलत खान-पान, तनाव और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण थायरॉइड हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। थायरॉइड दो प्रकार के होते हैं, हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायराइड। जब शरीर में मौजूद थायरॉयड ग्रंथि आवश्यकता से अधिक या कम थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन करने लगती है तो इसे थायरॉइड कहा जाता है।

थायरॉइड के कारण महिलाओं के पीरियड्स और प्रजनन क्षमता दोनों पर असर पड़ता है। आहार विशेषज्ञ ने बताया कि थायरॉइड महिलाओं की प्रजनन क्षमता को कैसे प्रभावित करता है।

हाइपोथायराइड क्या है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, हाइपोथायराइड की स्थिति महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। वहीं, हाइपरथायराइड में थायरॉयड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। वहीं हाइपोथायराइड में थायरॉयड ग्रंथि से कम मात्रा में थायराइड हार्मोन निकलता है और शरीर में थायरॉइड हार्मोन की मात्रा कम होने लगती है।

महिला प्रजनन क्षमता पर हाइपोथायराइड का प्रभाव

जब शरीर में थायरॉइड हार्मोन का स्तर कम होने लगता है तो इसका असर महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर पड़ता है।

थायरॉइड का स्तर कम होने पर ओव्यूलेशन प्रभावित होता है, जिसका सीधा संबंध प्रजनन क्षमता से होता है।

इसके कारण पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और महिलाओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।

दरअसल, हाइपोथायरॉइड अंडाशय से अंडे के निकलने को रोक सकता है। नियमित पीरियड्स के दौरान हर महीने अंडाशय से अंडे निकलते हैं, लेकिन जिन महिलाओं को हाइपोथायराइड की समस्या होती है, उनमें हर महीने अंडे ठीक से नहीं निकलते हैं।

यह निषेचित अंडे के विकास को भी प्रभावित कर सकता है।

जिन महिलाओं को थायरॉइड की समस्या होती है, उन्हें गर्भावस्था के दौरान भी अपने खान-पान और जीवनशैली का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है, अन्यथा बच्चे का विकास मुश्किल हो सकता है।

थायरॉइड के लिए 3 आवश्यक पोषक तत्व

हाइपोथायराइड में सेलेनियम, जिंक और आयोडीन थायराइड स्तर को संतुलित करने के लिए आवश्यक होते हैं। इसलिए जिन महिलाओं में थायरॉइड का स्तर कम होता है उन्हें सेलेनियम, जिंक और आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

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