कांग्रेस के G-23 के वरिष्ठ नेताओं की बगावती तेवर जारी हैं, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा प्रचार समिति के प्रमुख की ज़िम्मेदारी से इंकार के बाद अब आनंद शर्मा ने भी हिमाचल प्रदेश यूनिट की “सञ्चालन समिति” की ज़िम्मेदारी लेने से इंकार कर दिया है, आनंद शर्मा भी ग़ुलाम नबी आज़ाद की तरह केवल चुनाव प्रचार करना चाहते हैं, ज़िम्मेदारी लेना नहीं।
जानकारी के मुताबिक आनंद शर्मा ने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में कहा कि वह स्वाभिमान से समझौता नहीं कर सकते. सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी में आनंद शर्मा ने कहा कि परामर्श प्रक्रिया में उनकी उपेक्षा की गई है. पूर्व केंद्रीय मंत्री को 26 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश में संचालन समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था. बता दें कि आनंद शर्मा केंद्र में वाणिज्य और उद्योग मंत्री रह चुके हैं. जून 2014 से वो राज्यसभा में विपक्ष के उप नेता हैं.
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बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी G-23 के कई वरिष्ठ नेताओं को संगठन में बड़ी ज़िम्मेदारी देना चाहती हैं और इसीलिए उन्होंने आज़ाद और आनंद शर्मा को समितियों का प्रमुख बनाया मगर दोनों ही नेता किसी भी तरह की ज़िम्मेदारी लेने से बचना चाहते हैं और इसलिए दोनों ने समितियों से इस्तीफ़ा दिया है. बता दें कि कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गाँधी द्वारा मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद को केंद्र शासित प्रदेश में पार्टी की प्रचार समिति का प्रमुख नियुक्त किया था लेकिन आजाद ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. हालाँकि जम्मू और कश्मीर में आज़ाद के करीबी माने जाने वाले विकार रसूल वानी को सोनिया गाँधी ने नया अध्यक्ष नियुक्त किया था.

