मेरठ। एक अगस्त को ईद-उल-जुहा है और ईद-उल-जुहा पर कुर्बानी होती है। इसके लिए मुस्लिम लोग अपनी हैसियत के हिसाब से बकरा खरीदकर कुर्बानी करते हैं। रामपुर से प्रतिवर्ष बकरा पैठ में बकरा बेचने आने वाले एक व्यापारी का कहना हैं कि वे प्रतिवर्ष 15-20 लाख के बकरे लाकर बेचते थे, जिसमें उन्हें करीब 50 लाख रुपये बच जाते थे, लेकिन इस बार एक बकरे में 70 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि उन्हें अकेले ही करीब 50 लाख का नुकसान हुआ है। गौरतलब है कि मेरठ की हापुड़ रोड स्थित बकरा पैठ में राजस्थान, गुजरात, उत्तराचंल, हरियाणा और दिल्ली तक से पशु व्यापारी बकरा, ऊंट, भैस और मेढा बेचने के लिए आते थे। ईद से एक महीने पहले लगने वाली इस पैठ में करोड़ों का करोबार होता था। करीब 1 किमी के दायरे में फैली इस बकरा पैठ में लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता था, लेकिन इस बार अब ईद के चंद दिन ही शेष बचे हैं और गुलजार रहने वाली बकरा पैठ में खामोशी पसरी हुई है।
बकरा कारोबारी कहते हैं कि वे प्रतिवर्ष मेरठ ईद से एक महीने पहले आ जाते थे और इन दिनों में करीब 100 बकरे और भैंसों का व्यापार कर लिया करते थे। कोई भी बकरा 20 हजार से नीचे नहीं होता था और भैंस 15 हजार की। कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि जैसे-जैसे ईद नजदीक आती थी। बकरों के दाम और बढ़ते जाते थे, लेकिन इस बार महामारी के कारण सब कुछ चौपट हो गया है, जिस मौके का पूरे साल इंतजार किया जाता था। वह महामारी की भेंट चढ़ गया है।

