35 मरीजों की मौत प्राइवेट अस्पतालों पर उठा रही अंगुली

मेरठ रीजन35 मरीजों की मौत प्राइवेट अस्पतालों पर उठा रही अंगुली

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35 मरीजों की मौत प्राइवेट अस्पतालों पर उठा रही अंगुली

  • अब कोरोना से हुई हर मृत्यु का डैथ ऑडिट करेगी कमेटी- सीएमओ
  • मरीज को समय रहते मेडिकल को रेफर करना जीवन बचाने के लिये जरूरी

सुनील शर्मा

मेरठ। कोरोना संक्रमित मरीजों की हालत गंभीर हो जाने के बावजूद उनको देर से मेडिकल काॅलेज रेफर किये जाने का खामियाजा मरीज अपनी जान देकर चुका रहे हैं। सितंबर माह में मेडिकल काॅलेज रेफर किये 35 मरीजों की मौत प्राइवेट अस्पतालों पर अंगुली उठा रही है।

मेरठ के सीएमओ ने कहा है कि सितम्बर माह में प्राइवेट अस्पतालों द्वारा मेडिकल कालेज रेफर किये गये मरीज मंे से 35 की एक-दो दिन में ही मृत्यु हो गयी। उन्होने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों को यह जानना आवश्यक है कि उन्हें कब व किस स्थिति में मरीज को समय रहते मेडिकल को रेफर करना है ताकि मृत्युदर में कमी लायी जा सके। उन्होने कहा कि अब हर मृत्यु का डैथ आॅडिट आयुक्त द्वारा गठित कमेटी द्वारा किया जायेगा, जिसमें वह भी एक सदस्य है।

गौरतलब है कि लोकप्रिय अस्पताल में भर्ती मरीज को देर से मेडिकल काॅलेज रेफर किये जाने के मामले में सीएमओ की रिपोर्ट पर लोकप्रिय अस्पताल के स्वामी-प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी थी। जिसके जवाब में बुधवार शाम को लोकप्रिय अस्पताल के स्वामी व प्रबंधक डा. अतुल कृष्ण बौद्ध ने एसएसपी को एक पत्र लिखकर लोकप्रिय अस्पताल के स्वामी-प्रबंधन के खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने और एफआईआर दर्ज कराने वाले गौरीकांत मिश्रा और सीएमओ डा.राजकुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की भी मांग की थी। उक्त प्रकरण में तकनीकी तौर पर कौन सही है या कौन गलत यह तो शासन-प्रशासन ही तय कर सकते हैं। मगर प्राइवेट अस्पतालों पर मरीज को मेडिकल काॅलेज रेफर में देर किये जाने और इसी कारण मरीज की मृत्युु होने का आरोप मरीज के परिजन भी लगाते रहे हैं। हालांकि सभी प्राइवेट अस्पतालों को इसके लिये जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता और तकनीकी तौर पर शायद वह पूरी तरह से दोषी भी न हों। मगर सिर्फ सितंबर माह में मेडिकल के लिये रेफर किये गये 35 मरीजों की एक-दो दिन में ही मौत हो जाना प्राइवेट अस्पतालों को शक के दायरे में खड़ा करता है।

आज एलएलआरएम मेडिकल कालेज के आॅडिटोरियम में प्राइवेट अस्पतालों को कोरोना मरीज की देखभाल व अन्य विषयों पर जानकारी देने के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 राजकुमार ने भले ही सीधे तौर पर प्राइवेट अस्पतालों पर सवाल न उठाये हों लेकिन उन्होंने प्राइवेट अस्पतालों से मेडिकल काॅलेज रेफर किये जाने मरीजों की जल्द मृत्यु होने पर चिंता जताई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 राजकुमार का यह कहना कि मरीज की श्वांस 90 प्रतिशत से कम होने पर या निमोनिया होने पर या अनियंत्रित डाईबिटीज होने पर प्राइवेट अस्पतालों को मरीज को मेडिकल कालेज भेजा जाना चाहिए ताकि उसकी बेहतर देखभाल व उपचार किया जा सके, जाहिर करता है कि प्राइवेट अस्पताल मरीजों को देरी से मेडिकल काॅलेज भेज रहे हैं। गंभीर स्थिति में आ चुके मरीज की जान बचाने के सब प्रयास निरर्थक साबित होते हैं। मगर मेडिकल काॅलेेज में मरीज की मृत्यु होने से मेडिकल की साख खराब हो रही है। ऐसे में मौत का आंकड़ा मेडिकल काॅलेज के खाते में जुड़ जाता है और काॅलेज प्रबंधन को शासन-प्रशासन की नाराजगी झेलनी पड़ती है।
ऐसे में प्राइवेट अस्पतालों को कोरोना मरीज की देखभाल व अन्य विषयों पर जानकारी देने के लिए ही प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। अघोषित तौर पर यह माना जा रहा है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम होने के साथ प्राइवेट अस्पतालों को सीधे तौर पर चेतावनी देने का एक तरीका भी है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्राइवेट अस्पतालों को अपनी जिम्मेदारी समझने और मरीज के जीवन को गंभीरता से लेने की हिदायत देकर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का संदेश भी दिया गया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएमओ ने कहा भी है कि प्राइवेट अस्पतालों को यह जानना आवश्यक है कि उन्हें कब व किस स्थिति में मरीज को समय रहते मेडिकल को रेफर करना है ताकि मृत्युदर में कमी लायी जा सके। उन्होने कहा कि अब हर मृत्यु का डैथ आॅडिट आयुक्त द्वारा गठित कमेटी द्वारा किया जायेगा। इस कमेटी में वह भी बतौर एक सदस्य शामिल रहेंगे।

224 प्राईवेट अस्पतालों को दिया जायेेगा प्रशिक्षण
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 राजकुमार ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम तीन दिन तक चलेगा जिसमें 224 प्राइवेट अस्पतालों को प्रशिक्षण दिया जायेगा। मेडिकल कालेज के डा0 टी0वी0एस0 आर्य ने कहा कि इंफेक्षन प्रिवेन्शन एंड कंट्रोल (आईपीसी) का विशेष ध्यान देना आवष्यक है। उन्होने सीवर एक्युड रेसपीरेटरी इंफेक्शन (साॅरी) में मरीज व इन्फलुएंेजा लाईक इंलनेस (आईएलआई) के मरीज व उसकी पहचान के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में डा0 प्रिया बंसल, डा0 पूजा शर्मा ने भी व्याख्यान दिया। कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 राजकुमार, मेडिकल कालेज के डा0 टी0वी0एस0 आर्य, एसीएमओ डा0 पूजा शर्मा सहित प्राइवेट अस्पतालों से आये संचालक, चिकित्सकगण आदि उपस्थित रहे।

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