रुद्रप्रयाग – देव भूमि उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों के लिए ही नहीं बल्कि एडवेंचर टूरिज्म के लिए भी जाना जाता है. यहां के ट्रैक एडवेंचर के शौकीन पर्यटकों को हमेशा अपनी ओर आकर्षित करते हैं. उन्हीं ट्रकों में से एक चंद्रशिला चोटी (Chandrashila Trek) भी शामिल है. जो ना केवल साहसी खेलों को पसंद करने वाले लोगों को आकर्षित करती है, बल्कि चंद्रशिला शिखर अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए भी जाना जाता है. चंद्रशिला चोटी गढ़वाल हिमालय में मध्य वाले पहाड़ों में से एक है. पूरे साल ट्रेकिंग के लिए खुली रहने वाली चंद्रशिला शिखर तक जाने के लिए उखीमठ से चोपता होते हुए जाना पड़ता है.
रुद्रप्रयाग मैं आप धार्मिक लाभ लेने के साथ-साथ साहसी ट्रेकिंग का भी आनंद ले सकते हैं. ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए कई ऐसे पर्वत शिखर हैं जहां ट्रैकिंग का आनंद कई गुना बढ़ जाता है. उन्हीं में से एक चंद्रशिला शिखर है जहां पर पर्यटक हिमालय और मनोहारी दृश्यों का आनंद ले सकते हैं. समुद्र तल से 12000 फीट की ऊंचाई पर स्थित चंद्रशिला शिखर से आपको केदार चोटी, त्रिशूल चोटी, नंदा देवी चोटी, चौखंबा चोटी, दिखाई देती है. चंद्रशिला शिखर से चोटियों का यह विहंगम दृश्य इस क्षेत्र के सबसे बड़े पर्यटक आकर्षणों में से एक है.
ट्रेकिंग के शौकीन 9:00 के लिए चंद्रशिला शिखर एक अद्भुत और रोमांच पैदा कर देने वाला ट्रैक साबित होता है शिखर तक पहुंचने के लिए करीब 5 किलोमीटर के ट्रैक को पार करना होता है यह ट्रैक चोपता से शुरू होकर तुंगनाथ तक समाप्त होता है तुम नाथ से 1 किलोमीटर का लंबा ट्रैक है जो पूरी तरह से खड़ी चढ़ाई है यहां से चंद्रशिला तक का सफर हालांकि बहुत कम है लेकिन पहाड़ी रास्ते और उबड़ खाबड़ ट्रैक इसे थोड़ा मुश्किल बनाते हैं सर्दियों में बर्फबारी के कारण जहां ट्रैकिंग बहुत मुश्किल होती है
चंद्रशिला शिखर (Chandrashila Trek) की धार्मिक मान्यताएं
चंद्रशिला पर्वत ना केवल ट्रेकिंग के लिए ही जाना जाता है बल्कि इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं भी हैं. कहा जाता है कि रामायण में रावण को हराने के बाद भगवान राम ने चंद्रशिला शिखर पर तपस्या की थी. मान्यता यह भी है कि चंद्रदेव ने यहां बहुत समय रहकर तपस्या की. जिस कारण से इस शिखर का नाम चंद्रशिला रखा गया.

