Dhami Government: धामी के मंत्रियों और नौकरशाही के बीच 36 का आंकड़ा,राज्य में 126 के मुकाबले मात्र 72 आईएएस

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देहरादून। उत्तराखंड की धामी सरकार ने फिर से छह आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी का तबादला किया है। इससे सवाल खड़ा हो गया कि क्या उत्तराखंड में नौकरशाह परेशान हैं! प्रशासनिक सेवा के आईएएस अधिकारियों के 126 के कैडर के मुकाबले राज्य में मात्र 78 आईएएस हैं। इनमें से छह केंद्र में डेपुटेशन पर हैं। बचे 72 अफसरों में कई जाने की तैयारी में हैं। अब इससे कामकाज जहां प्रभावित है वहीं जानकार इसे अच्छा संकेत भी नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि सिस्टम में कुछ खामी है। राजनीतिक हस्तक्षेप को बड़ा कारण बताया जा रहा है। फॉरेस्ट चीफ रह चुके रिटायर्ड आईएफएस अधिककारी जयराज कहते हैं कि सेंट्रल सर्विसेज़ का चार्म है। कोई अधिककारी इस मौके को नहीं छोड़ना चाहता। इससे एक्सपोज़र बढ़ता है और करियर में एडिशनल सेक्रेटरी या फिर सेक्रेटरी जैसे असाइनमेंट मिलने में आसानी होती है। हां पहले कमी से जूझ रहे राज्य में यदि एक के बाद एक अधिकारी जा रहे हैं तो मामला गंभीर है। एक नज़र में देखिए कितने पदों के बरक्स अफसर यहां हैं।

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नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि उत्तराखंड में राजनीतिक हस्तक्षेप बड़ा कारण है। केंद्र में मौका मिले तो कोई उत्तराखंड में टिकना नहीं चाहता। आए-दिन मंत्रियों और अधिककारियों के बीच विवाद आम बात है। आए-दिन अधिकारी के विभागों में बदलाव काम के माहौल को प्रभावित करते हैं। चार दिन पहले करीब 50 आईएएस व पीसीएस अधिकारियों के विभाग बदले। राज्य पर्यटन मंत्री सतपाल और उनके विभाग के सचिव के बीच तनातनी की जानकारी होनेे के बाद दिलीप जावलकर की जगह सचिन कुर्वे को विभाग में लाया गया। यह वही कुर्वे हैं जिनके साथ मंत्री रेखा आर्या उलझी थीं। और कुर्वे की कॉंफिडेंशियल रिपोर्ट तक तलब की थी। मंत्री सौरभ बहुगुणा पहले अफसरों पर नाराज़ हो चुके हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नौकरशाही पर लगाम कसने जैसे बयान पहले ही दे चुके हैं।

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