Lumpy Skin Disease: लंपी स्किन डिजीज के समाधान हेतु देशवासियों से खुला आह्वान, जिसके पास कोई समाधान आगे आयें

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ऋषिकेश। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने ‘लंपी स्किन डिजीज’ के संक्रमण पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि गौ माता को हिंदू धर्म में दिव्यता से युक्त और पवित्र माना गया है। धार्मिक, सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से मानव जीवन के लिये गौ माता एक वरदान है। वह ममत्व से युक्त अत्यंत संवेदनाशील प्राणी है जिसका भारत की श्वेत क्रांति और ग्रामीण समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान है। हाल ही में, भारत के कुछ राज्यों में गौ वंश और अन्य मवेशियों में गाँठदार त्वचा रोग यानी ‘लंपी स्किन डिजीज’ के संक्रमण के मामले सामने आए हैं। ज्यादातर मामले राजस्थान से हैं। राजस्थान में अब तक इस लंपी वायरस से गौवंश के अलावा अन्य पशु भी संक्रमित हो रहे हैं तथा हजारों की मौत हो चुकी है। लंपी वायरस से सर्वाधिक 90 फीसदी तक गाय संक्रमित हैं और गायों की ही सबसे ज्यादा मौत भी हुई है।

लंपी वायरस कैप्रिपॉक्स फैमिली का वायरस है। गोट पॉक्स और शिप पॉक्स की तरह ही मवेशियों में यह लंपी स्किन डिजीज के नाम से बीमारी फैला रहा है। ये बीमारी काटने वाली मक्खियों, मच्छरों, दूषित जल से फैलती है। यह एक संक्रामक बीमारी है जो संक्रमित के सीधे संपर्क में आने से दूसरे को भी हो जाती है। इस बीमारी में गौवंश और अन्य प्राणियों के शरीर का तापमान काफी बढ़ जाता है और उन्हें भूख नहीं लगती है। उनके पूरे शरीर पर जगह-जगह गांठ बन जाते हैं। इन गांठों का आकार 2-5 सेमी होता है, जो खासकर गर्दन, थूथन, नासिका, जननांग, आँख की पलकों, थन, पेट और पूंछ पर पायी जाती हैं। गांठे गोल और उभरी हुई होती हैं लेकिन इनसे शरीर पर अल्सर जैसे घाव बन जाते हैं।

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यह एक ऐसी बीमारी है जो वायरस के कारण होती है, अभी तक इसका कोई खास इलाज नहीं मिल पाया है। अभी मौजूदा वक्त में टीकाकरण ही इसके रोकथाम और नियंत्रण का सबसे प्रभावी इलाज माना जा रहा है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने देशवासियों का आह्वान करते हुये अपने संदेश के माध्यम से कहा कि सरकार अपने स्तर पर प्रभावी कार्य कर रही है पन्तु अगर किसी के पास इस बीमारी का कोई समाधान है तो वह आगे आये ताकि गौवंश को बचाया जा सके।

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