क्या पूर्वांचल में राजभर बिगाड़ सकते है भाजपा का खेल ?

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क्या पूर्वांचल में राजभर बिगाड़ सकते है भाजपा का खेल ?

By Dhiraj Upadhyaya

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Election) में अभी 4 माह का समय शेष है लेकिन राजनीतिक दलों ने चुनावी रण को साधने के लिए नए सियासी समीकरण बनाने शुरू कर दिए हैं।  यूपी में आज सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के 19वें स्थापना दिवस के अवसर पर पूर्वांचल के के मऊ (Mau) में SBSP अध्यक्ष ओपी राजभर (OP Rajbhar) ने सपा के साथ अपने गठबंधन का ऐलान किया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ मंच साझा करते हुए राजभर ने कहा कि अगर मैं “भाजपा की सरकार बना सकता हूँ तो सरकार को हटा भी सकता हूँ”। इस मंच से अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने भी योगी सरकार पर निशाना साधा और छोटे दलों के साथ मिलकर उसे हटाने का संकल्प लिया।

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पूर्वांचल में राजभर की सुभासपा बिगाड़ सकती है भाजपा का खेल

बता दें कि पूर्वांचल में करीब 28 जिलें आते है जिसमें 160 सीटें हैं। जो प्रदेश की कुल 403 सीटों का लगभग 33 फीसदी होता है। आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में पूर्वांचल जीतने वाली पार्टी ही लखनऊ में सरकार बनाती है। 2017 के चुनाव में पूर्वांचल में बीजेपी ने 115 सीट पर कब्जा जमाया था जबकि 2012 में सपा को 85 सीटें और 2007 में बसपा को 70 से भी ज्यादा सीटें मिली थीं। यही कारण है कि भाजपा पिछले एक महीने से अपने सभी बड़े कार्यक्रम और पीएम मोदी के दौरे इस क्षेत्र में कर रही है। सपा ने भी भाजपा की राह  अपनाते हुए छोटों दलों को साध भाजपा को चुनौती दे रही हैं।

राजभर का पूर्वांचल का वोट गणित

ओम प्रकाश राजभर की सियासी ताकत उनका राजभर समाज है, भले ही यूपी में राजभर वोटर केवल 3 फीसदी हैं, लेकिन पूर्वांचल में इनकी संख्या 12 से 22 फीसदी तक है, जो सूबे में सरकार बनाने में निर्णायक साबित हो सकती है। राजभर का प्रभाव गाजीपुर के साथ पूर्वांचल के अन्य जिलों मऊ, बलिया, आजमगढ़, वाराणसी, चंदौली, अंबेडकरनगर, जौनपुर, भदोही और मिर्जापुर में भी है। इसलिए अखिलेश यादव ने ओमप्रकाश राजभर और संजय चौहान जैसे नेताओं के साथ क्षेत्र के वोटरों को साधने के लिए हाथ मिलाया है।

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गौरतलब है कि ओपी राजभर ने 2017 में भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था जिसका फायदा दोनों पार्टियों को हुआ था।  उस समय सूबे में 22 सीटों पर भाजपा की जीत में राजभर का बड़ा योगदान था। हालांकि पूर्वांचल में सभी दल इस क्षेत्र में जोर आजमा रहे है, चाहे वो कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी हो या सुभासपा के अंतर्गत छोटे दलों का समूह भागीदारी संकल्प मोर्चा, सभी अपना पूरा जोर पूर्वांचल में लगा रहे है।

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