यूपी चुनावी दंगल 2022: सिराथू से उपमुख्यमंत्री केशव ने किया नामांकन, कितनी कठिन होगी डगर, ये है सियासी समीकरण

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यूपी चुनावी दंगल 2022: सिराथू से उपमुख्यमंत्री केशव ने किया नामांकन, कितनी कठिन होगी डगर, ये है सियासी समीकरण

लखनऊ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने गुरुवार को कौशांबी जिले की सिराथू विधानसभा सीट से अपना नामांकन किया है। यह सीट काफी चर्चा में आ गई है क्योंकि यहां से समाजवादी पार्टी में अपना दल कमेरावादी की पल्लवी पटेल को चुनावी मैदान में उतारा है। गौरतलब है कि पल्लवी पटेल एनडीए सरकार की सहयोगी और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की सगी छोटी बहन है।

संघर्षों से भरा रहा है केशव प्रसाद का जीवन

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य प्रदेश के बड़े शहरों में से एक हैं। उनके राजनीतिक कौशल का ही कमाल था कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी में प्रचंड जीत हासिल की थी। मौजूदा योगी सरकार में वह कद्दावर मंत्रियों में से एक हैं। इन सारी उपलब्धियों के बीच केशव प्रसाद मौर्य का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। सिराथू तो केशव प्रसाद मौर्य की जन्मस्थली है। 2012 में हुआ यहां से पहली बार विधायक बने थे लेकिन उनके जीवन पर नजर डालें तो पिता कभी रेलवे स्टेशन पर चाय बेचा करते थे। बाद में केशव प्रसाद मौर्य विश्व हिंदू परिषद से जुड़ गए और इलाहाबाद में रहने लगे। विश्व हिंदू परिषद में जुड़ने के बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और सक्रिय राजनीति में शामिल हो गए।

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बसपा के तिलिस्म को तोड़ा

सिराथू विधानसभा सीट कभी बसपा का गढ़ हुआ करता था। 2000 पहले से यह सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित थी। जिस पर बसपा ने 1993 से 2007 तक लगातार जीत हासिल की थी। 2012 में परिसीमन बदलने के बाद यह सीट सामान्य हो गई जिसके बाद यह बसपा से दूर भी हो गई। 2012 में भारतीय जनता पार्टी ने केशव प्रसाद मौर्य को टिकट दिया और उन्होंने यहां पर पहली बार गैर बसपा का झंडा बुलंद किया।

2014 में सांसद बने तो सपा ने कब्जा ली सीट

हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी में केशव प्रसाद मौर्य की लोकप्रियता को देखते हुए फूलपुर से प्रत्याशी बना दिया जहां से वह सांसद चुन लिए गए। 1993 से लेकर 2007 तक सिराथू विधानसभा सीट पर सपा और भाजपा लगातार हार का सामना कर रही थी, वहीं 2012 और 14 के बीच में दोनों ही दलों के प्रत्याशियों नेहा से जीत दर्ज की। 2012 में केशव प्रसाद मौर्य यहां से विधायक बने लेकिन 2014 में सांसद बनने के बाद जब इस सीट पर उपचुनाव हुए तो सत्ता में आसीन समाजवादी पार्टी ने यहां से जीत दर्ज कर ली। उसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में केशव प्रसाद मौर्य सांसद होने के साथ-साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी थे। 2017 में बीजेपी ने सिराथू विधानसभा क्षेत्र शीतला प्रसाद को टिकट दिया और जीत दर्ज की। इसके बाद प्रचंड बहुमत की सरकार बनी जिसमें केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री बनाए गए। फिलहाल वह MLC हैं और इस बार भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर सिराथू विधानसभा सीट से एक बार फिर दावेदारी कर रहे हैं।

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आसान नहीं है राह

केशव प्रसाद मौर्य ने 2012 में भले ही भारतीय जनता पार्टी को यहां से पहली बार जितवाया था लेकिन 2022 में इस बार यह आसान नहीं होने जा रहा है। सिराथू विधानसभा सीट पर पटेल और कुर्मी वोटर बड़ी संख्या में है इसको देखते हुए समाजवादी पार्टी ने अपने सहयोगी अपना दल कमेरा वादी के डॉक्टर पल्लवी पटेल को प्रत्याशी बनाया है। समाजवादी पार्टी ने कोशिश की है कि यादव मुस्लिम और पटेल वोट बैंक को एक साथ लाकर यहां पर भारतीय जनता पार्टी को पटकन ही दी जाए। इसके अलावा बसपा ने यहां से संतोष त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है जो भारतीय जनता पार्टी के लिए घातक साबित हो सकते हैं।

ये हैं वोटबैंक

सिराथू विधानसभा सीट पर जातिवाद वोट बैंक की बात करें तो यहां पर कुल 365000 से अधिक मतदाता है जिसमें से 34 फ़ीसदी पिछड़ा वर्ग से आते हैं। वहीं करीब 35 फ़ीसदी वोट बैंक दलित वर्ग का है जबकि 19% मतदाता सामान्य वर्ग से हैं। इसके अलावा करीब 13% मुस्लिम मतदाता भी हैं। यहां पर हमेशा से दलित और पिछड़े निर्णायक की भूमिका में रहते हैं।

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