बागी बलिया में लगातार बदल रहा समीकरण, किस करवट बैठेगा ऊंट

विधानसभा चुनावबागी बलिया में लगातार बदल रहा समीकरण, किस करवट बैठेगा ऊंट

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बागी बलिया में लगातार बदल रहा समीकरण, किस करवट बैठेगा ऊंट

बलिया। बलिया (Baliya) में लगातार चुनावी समीकरण बदल रहे हैं। वहीं बलिया जनपद की बेल्थरारोड विधानसभा में लड़ाई छड़ी, हाथी एवं कमल के बीच त्रिकोणात्मक है। अन्य दल लड़ाई से बाहर हैं, किन्तु चुनावी पंडित त्रिकोणात्मक को भी नकारकर मुकाबला छड़ी और हाथी के बीच मान रहे हैं। क्योंकि जातीय समीकरण व अपनों की नाराजगी देखने पर ऐसा ही प्रतीत हो रहा। लेकिन बेल्थरारोड की मौन जनता का मन भांपना बड़ा मुश्किल लग रहा है। वैसे दस मार्च को ही पता चल पाएगा कि ऊंट किस करवट बैठेगा।

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बेल्थरारोड विधानसभा (Beltharrod Assembly) में 2017 में हुए मतदान पर गौर करें तो उस समय मतदाताओं की कुल संख्या 332833 है। बीते 5 सालों में मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी होना लाजिमी है। इस विधान सभा में अनुमानित मतदाता अनुसूचित- 80000, यादव- 60000, राजभर- 50000, मुस्लिम- 30000, कोइरी- 20000 , चौहान- 10000, वैश्य- 30000, क्षत्रिय- 25000 और ब्राम्हण- 10000, धोबी- 10000 के आसपास व बाकी अन्य मतदाता है। बात अगर पार्टियों के जातीय समीकरण पर बन रहे जनाधार की करें तो सपा-सुभासपा गठबंधन में यादव, राजभर, मुस्लिम जाति के मतदाता मुख्य मानें जा रहे हैं। जिसके गणित से वह चुनाव में आगे दिख रही है। लेकिन जमीनी हकीकत की ओर जाएं तो राजभर 2017 के चुनाव में या उससे पहले भी भाजपा से जुड़े रहे है। लेकिन ओमप्रकाश के आने से और उनके सिम्बल से चुनाव लड़ने के कारण राजभर बिरादरी के प्रतिशत में सर्वाधिक झुकाव छड़ी पर माना जा रहा है। रही बात कमल की तो, कमल के तरफ क्षत्रिय, ब्राम्हण, वैश्य के अलावे चौहान, खड़ा माना जा रहा है। जो पिछले चुनाव में बीजेपी के 15 साल के सूखे को समाप्त कर दिया। लेकिन इस बार अंदरखाने की नाराजगी ही उसपर भारी पड़ती दिखायी दे रही है।

वहीं हाथी विधानसभा में सबसे अधिक अनुसूचित जाति का वोट होने के कारण अकेले दम पर दहाड़ती हुई दिख रही है। जातीय समीकरण पर चुनावी पंडित गठबंधन को आगे मान रहे हैं किंतु हाथी की सवारी के लिए कुछ क्षत्रिय, वैश्य व मुस्लिम बेचैन हैं। ऐसे में लड़ाई त्रिकोणीय बनी हुई है, लेकिन चुनावी पंडित मुख्य मुकाबला गठबंधन और हाथी के बीच मान रहे। क्योंकि पिछले विधानसभा चुनावों में बसपा प्रत्याशी को मिले मतों पर ध्यान दें, तो 2012 में छठ्ठू राम 47066 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहकर 10297 मतों से पराजित हो गए।

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2017 में बसपा से घूरा राम भी 47297 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। जो यह दर्शा रहा है कि प्रत्याशी चाहे कोई रहा हो, मत प्रतिशत बरकरार रहा। यदि कमल ने अपने वोटों के बिखराव को रोकने में कामयाब भी हो जाय तब भी गणित सटीक नहीं बैठ रहा। क्योंकि 2017 में राजभर और कोइरी वोट कमल के साथ था जो इस चुनाव में नहीं दिख रहा। हालांकि ऐसा सम्भव नहीं लग रहा कि भाजपा (BJP) नाराज वोटों को रोक पाएगी। उधर अनुसूचित वोट में बिखराव नगण्य दिख रहा और हाथी के प्रत्याशी का क्षेत्र का होना, व्यक्तिगत सम्बन्ध और भाजपा के नाराज कार्यकर्ताओं का साथ मजबूत स्थिति पैदा कर रहा। इस प्रकार देखने में गठबंधन और बसपा मुख्य प्रतिद्वन्दी हैं किंतु भाजपा को कम आंकना भी भूल होगी।

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