लखनऊ। यूपी बोर्ड बलिया पेपर लीक मामले में अब प्रशासन अपनी नाक बचाने के लिए फर्जी तरीके से मुकदमा दर्ज करके अपने आप को बचाने में जुटा है। प्रशासन की ओर से जारी नोटिस के हिसाब से कैमरे और वायस रिकार्डर यूपी बोर्ड की हर परीक्षा केन्द्र पर लगाना आवश्यक है। परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों की निगरानी करने के लिए इन कैमरों को जिले के कंट्रोल रूम से जोड़ कर रखा गया है। लेकिन मुद्दा ये है कि पेपर लीक की घटना कैमरे के पकड़ में क्यों नहीं आई, जबकि ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम द्वारा निगरानी रखी जा रही थी। और जब प्रश्नपत्र की काला बाजारी होने लगी तो फर्जी मुकदमा दर्ज करके प्रशासन खुद को बचाने की कोशिश में जुट गया है।
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जिला प्रशासन के साथ पुलिस को भी शासन की ओर से बोर्ड परीक्षा में नकल न हो पाए और नकल रहित परिक्षा कराई जाए ऐसी जिमेदारी दी गई है। कैमरों और वायस रिकार्डर की मद्द से ऑनलाइन के माध्यम से कड़ी सुरक्षा रखने को भी कहा गया है। जिला स्तर पर कंट्रोल रूम भी बनवाये गये हैं इसके बाद भी पेपर आउट हो गया जिसपर लगातार सवाल उठ रहे हैं। एक सवाल और उठ रहा है कि ऑनलाइन मॉनिटरिंग हो रही थी सिस्टम काम क्यों नहीं कर पाया।
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बता दें, कई अधिकारीयों और सफेदपोश को रडार पर रखते हुए इस बलिया पेपर लीक मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई है। दो दिन तक जिले में केंद्र निर्धारण से लेकर अन्य मामलों की पत्रावलियों की कार्रवाई करने के बाद शासन की तीन सदस्यीय टीम अब वापस लौट चुकी है।

