भगवान भरोसे करेंसी

आर्टिकल/इंटरव्यूभगवान भरोसे करेंसी

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अमित बिश्‍नोई

विचारों का क्या है, कभी भी कहीं भी आ सकते हैं, जैसे केजरीवाल को दीवाली की पूजा पर आ गया कि देश की करेंसी पर देवी देवताओं की तस्वीर होना चाहिए, ज़ाहिर सी बात है कि विचार करेंसी को लेकर आया है तो देवी देवता भी उसी से रिलेटेड होंगे, यानि धन की देवी लक्ष्मी और विघ्नों से बचाने वाले भगवान् गणेश जी. अब एक राजनेता को जब ऐसा विचार आया तो उसपर राजनीतिक चर्चा भी होनी ज़रूरी है, हालाँकि ऐसा नहीं कि किसी राजनेता को देवी देवता का विचार नहीं आ सकता, ज़रूर आ सकता है लेकिन सामने जब गुजरात जैसे राज्य का चुनाव हो मुख्य लड़ाई उस पार्टी से हो जिसके पास देवी देवताओं का पेटेंट है तो बात कुछ और हो जाती है.

केजरीवाल ने दीवाली पर आये अपने इस विचार को तुरंत ही प्रस्ताव में बदल दिया और बाकायदा केंद्र से मांग कर डाली। गनीमत इतनी रही कि उन्होंने नोटों से गाँधी जी को हटाने की बात नहीं कही, उन्होंने गाँधी जी को बरकारार रखते हुए लक्ष्मी -गणेश की तस्वीर लगाने का प्रस्ताव किया, केजरीवाल ने कहा कि मुझे देवी देवताओं के आशीर्वाद की बहुत ज़रुरत है, हालाँकि उन्होंने यह नहीं बताया कि नोटों पर तस्वीर छपने से उन्हें देवी देवताओं का आशीर्वाद कैसे मिलेगा लेकिन आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता आतिशी ने इसको स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि करेंसी नोटों पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर छपने से लोगों में समृद्धि आएगी, अर्थव्यस्था में सुधार के लिए भगवान् का आशीर्वाद मिलेगा, इसलिए लोगों को केजरीवाल जी के इस प्रस्ताव का विरोध नहीं करना चाहिए। आतिशी ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए कहा कि भाजपा के नेता भले केजरीवाल जी से नफरत करें लेकिन कम से कम गणेश भगवान् और देवी लक्ष्मी से तो नफरत न करें। यानी AAP ने देश की गिरती जीडीपी को उभारने का मोदी जी को एक बड़ा कारगर उपाय बता दिया है, इस बारे में तो मोदी जी या भाजपा ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि देश की अर्थव्यवस्था ऐसे भी सुधर सकती है. अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए केजरीवाल के इस आईडिया से देश ही क्या पूरी दुनिया लाभ उठा सकती है, हर देश अपने भगवान्, देवी देवताओं की तस्वीरों का करेंसी पर इस्तेमाल का सकती है. पूरी दुनिया इन दिनों मंदी के दौर से गुज़र रही है, उम्मीद है केजरीवाल का यह आईडिया दुनिया को मंदी से उबरने में पूरी मदद करेगा।

खैर हम वापस अपने देश लौटते हैं और केजरीवाल के करेंसी पर देवी देवताओं को छापकर कैसे खुशहाली ला सकते हैं इस पर बात करते हैं. तो देश में चल रहे चुनावी मौसम में देवी देवताओं की बात कहने का हक़ सिर्फ भाजपा के पास रहता है ऐसे में केजरीवाल लगातार घुसपैठ की कोशिश में लगे हैं. उनके इस बयान को धर्म की राजनीति में घुसपैठ ही माना जा रहा है, तभी भाजपा ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में केजरीवाल को चुनावी हिन्दू का नाम दे दिया। साथ ही लक्ष्मी का पुजारी बताते हुए दिल्ली में चल रहे करप्शन के मामलों पर कटाक्ष किया है, AAP सरकार के कई मंत्री करप्शन के मामलों में फंसे हुए हैं जिसमें उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का नाम ख़ास है. ऐसे में अगर केजरीवाल लोगों का ध्यान हटाने के लिए इस तरह का हिन्दू कार्ड खेला है तो इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है. वैसे भी केजरीवाल चुनावी हिन्दू हों या न हों लेकिन मोदी जी की तरह चुनावजीवी ज़रूर बनते जा रहे हैं. मोदी जी की तरह वह 24*7 की अब राजनीति करने लगे हैं. केजरीवाल भी अब दिल्ली तक सीमित नहीं हैं, पंजाब फतह कर चुके हैं और अब निगाहें गुजरात और हिमाचल पर हैं. ऐसे में उन्हें हिंदुत्व की सियासत करने से भी कोई परहेज़ नहीं है, भले ही भाजपा के पास इसका पेटेंट हो.

वैसे देखा जाय तो केजरीवाल के इस प्रस्ताव पर केंद्र की भाजपा सरकार को कोई ऐतराज़ नहीं होना चाहिए बल्कि यह प्रस्ताव तो उसकी राजनीती के लिए बिलकुल फिट बैठता है, केजरीवाल ने तो एक तरह से उन्हें एक मौका दिया है कि वह ऐसा कुछ कर 2024 के चुनाव के लिए अपना रास्ता और समतल कर सकें लेकिन भाजपा को परेशानी सिर्फ यह होगी कि इस तरह के प्रस्ताव को मानने का मतलब किसी और क्रेडिट देना होगा और भाजपा यह काम कभी नहीं कर सकती और इसीलिए केजरीवाल के इस बयान पर भाजपा नेता इतना हमलावर है. बहरहाल केजरीवाल ने करेंसी नोट पर देवी देवता की तस्वीर छापने की मांग करके देश को राजनीतिक चर्चा का एक विषय दे दिया है लोग उसमें जुट भी गए हैं. बात अर्थव्यस्था के सुधारने और रूपये के अवमूल्यन को रोकने तक पहुँच गयी है. कुल मिलाकर अब भगवान भरोसे करेंसी की बात है, पता नहीं मोदी जी केजरीवाल की बात मानेंगे या नहीं वैसे अर्थव्यवस्था सुधारने और रूपये का अवमूल्यन रोकने का इससे अच्छा आईडिया और कोई नहीं हो सकता।

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