Political Parties: इस बार टिकट के तलबगारों से भाजपा और कांग्रेस दोनों परेशान

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सोलन। इस बार विधानसभा चुनावों में टिकट के चाह वालों की लंबी लिस्ट है। जिसके भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों की जीत की राह आसान नहीं होगी। जिले के पांचों सीटों के लिए भाजपा-कांग्रेस से टिकट के तलबगारों की लंबी लाइन है। मुख्य दलों को अभी से खतरा सता रहा है कि ये टिकट नहीं मिलने वाले बगावत कर चुनावों में हुंकार भरेंगे तो उनको खतरा उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के पास बागियों की लंबी लिस्ट मौजूद है। ये बागी विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदार जताते आए हैं। जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों में सीधे तौर बागी प्रत्याशी पार्टी के उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इसमें भाजपा को तीन विधानसभा सीटों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं कांग्रेस के लिए भी खतरा कम नहीं है। हालांकि अभी तक भाजपा ने टिकट पूरी तरह से फाइनल नहीं किए हैं। कांग्रेस की तस्वीर अभी साफ है। ऐसे में भीतरघात का खतरा दोनों दलों पर मंडराने लगा है। टिकट तय होने पर खुलकर भीतरघात सामने आएगा। जिसे शांत करना पार्टी पदाधिकारियों के लिए बड़ा मुश्किल होगा।

जिले में भाजपा की राह मुश्किल में है। भाजपा के लिए नालागढ़,अर्की और सोलन विधानसभा क्षेत्र में दो से तीन दिग्गज दावेदारी जता रहे हैं। सोलन में पूर्व प्रत्याशी राजेश कश्यप के अलावा तरसेम भारती इस बार टिकट की दावेदारी जता रहे हैं। यहां पर महिला का नाम टिकट की सूची में चल रहा है। इसी तरह अर्की में पिछले दो विधानसभा चुनावों में पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा टिकट आवंटन पर अपनी तल्खी जता चुके हैं। हालांकि बाद में उन्हें मना लिया था। लेकिन पार्टी यहां से चुनाव हार गई थी। यहां पर महिला जिला परिषद सदस्य इस बार टिकट के लिए दावेदारी जता रही हैं। नालागढ़ में लखविंद्र राणा के भाजपा में आने के बाद केएल ठाकुर अब खुलकर टिकट के लिए दावा जता रहे हैं। मुख्यमंत्री की जनसभा में दोनों शक्ति प्रदर्शन कर चुके हैं।

वहीं कांग्रेस का भीतरघार किसी से छुपा नहीं है। कांग्रेस नालागढ़,कसौली और अर्की में मुश्किल में है। सबसे अधिक परेशानी कसौली सीट से कांग्रेस को आ रही है। यहां पर भीतरघात के कारण कांग्रेस तीन बार चुनाव हार चुकी है। इस बार यहां से सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार ध्यान सिंह टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। उन्हें टिकट मिलना मुश्किल भी है। ऐसे में कांग्रेस के लिए परेशानी भी बढ़नी तय है। इसी के साथ अर्की में कांग्रेस के बागी राजेंद्र ठाकुर बतौर बागी उम्मीदवार चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। जो कांग्रेस को मुश्किल में डाल रही है। नालागढ़ में बावा हरदीप सिंह को टिकट मिला तो उन पर बाहरी का तमगा पहले से लगा है। कांग्रेस के स्थानीय उम्मीदवार उनके खफा हैं।

जिले में 2017 के चुनाव में भाजपा को तीन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। इसमें सोलन, अर्की और नालागढ़ सीट कांग्रेस ने जीती थी। हालांकि अर्की में उपचुनाव में भी भाजपा हारी थी। उपचुनाव में राष्ट्रीय नेताओं ने अर्की में पड़ाव डाला था। इसके बावजूद भाजपा सीट नहीं बचा सकी थी। भीतरघात ने भाजपा को हरा दिया था। इस बार अर्की में भाजपा के लिए राहें आसान नजर नहीं आ रही है। यहां पर तीन उम्मीदवार अपनी दावेदारी पहले से जता चुके हैं।

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