कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए कल यानि 17 अक्टूबर को वोट जाएंगे, मतदान सुबह 10 से शाम चार बजे तक होगा, मुकाबला मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर के बीच है। इस चुनाव में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य हिस्सा लेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष के लिए पार्टी के वो 9 हजार प्रतिनिधि मतदान करेंगे जो प्रदेश कांग्रेस समितियों के सदस्य हैं जिन्हें डेलीगेट्स भी कहा जाता है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी कर्नाटक के बेल्लारी के संगनाकुल्लू में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, राहुल गाँधी यूपी से डेलीगेट हैं. इस चुनाव में भारत जोड़ो यात्रा में शामिल लोगों के लिए खास तौर पर पोलिंग स्टेशन बनाया गया है. वहीँ मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, एआईसीसी के महासचिव, राज्यों के प्रभारी, सचिव और संयुक्त सचिव कांग्रेस हेडक्वॉर्टर में वोट डालेंगे। कांग्रेस मुख्यालय के अतिरिक्त देशभर में मौजूद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दफ्तरों में मतदान होगा।
वहीँ चुनाव समिति के प्रमुख मधुसूदन मिस्त्री ने आश्वस्त किया है चुनाव पूरी तरह से पारदर्शी और गुप्त मतदान होगा। उन्होंने बताया कि मतदान के लिए देशभर में 38 पोलिंग सेंटर बनाए गए हैं। मिस्त्री ने आगे कहा कि ऐसा सुनिश्चित किया गया है कि किसी को भी यह पता न चल सके कि किसने किसको वोट किया है. इसके अलावा किस उम्मीदवार को किस राज्य से कितने वोट प्राप्त हुए हैं इसको भी गोपनीय रखा जायेगा। अध्यक्ष पद के मैदान में उतरे दोनों ही उम्मीदवारों ने बाकायदा अपने चुनावी घोषणा पत्र भी जारी किये हैं जिसमें दोनों ने कई वादे भी किये हैं.
मल्लिकार्जुन खड़गे के वादों की बात करें तो उन्होंने कहा है कि पार्टी के 50 फीसदी पदों पर 50 साल से कम उम्र के नेताओं की नियुक्ति होगी। उदयपुर डिक्लेरेशन को पूरी तरह से लागू किया जाएगा। महिलाओं, एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के नेताओं को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। कोई भी नेता एक पद पर पांच साल से ज्यादा समय तक ना रहे, इसे सुनिश्चित किया जायेगा। 2024 के चुनाव में बीजेपी के खिलाफ पूरी ताकत के साथ लड़ने के लिए पार्टी को तैयार करेंगे।
वहीँ शशि थरूर के एलानों में युवाओं-महिलाओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को सशक्त किया जाएगा। प्रदेश, जिला और ब्लॉक संगठन के फैसले दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के बजाय स्थानीय स्तर पर करने का फॉर्मूला रखेंगे। मेहनती कार्यकर्ताओं को ज्यादा दायित्व और सम्मान दिया जाएगा। 5 0 से कम उम्र के लोगों को संगठन में अहम पद, चुनाव में टिकट और एक सीट पर 2 चुनाव हारने वाले को टिकट दोबारा नहीं मिलेगा। कार्यकर्ताओं से सीधे रिश्ते बनाए रखने पर जोर होगा।

