कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव को लेकर इन दिनों चुनाव प्रचार चरम पर है , 17 अक्टूबर को देश की सबसे पुरानी पार्टी के नए अध्यक्ष के लिए मतदान होना है. अध्यक्ष पद के दोनों प्रत्याशी मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर पार्टी के उन नौ हज़ार डेलीगेट्स से मिलने का पूरा प्रयास कर रहे हैं जिन्हे चुनाव में मत डालने का अधिकार है. दोनों ही उम्मीदवार राज्यों के मुख्यालयों में जाकर कांग्रेसियो के बीच अपनी बात रख रहे हैं, यह अलग बात है कि वहां पर किसी उम्मीदवार को ज़्यादा तवज्जोह मिल रही है तो किसी को कम. ऐसा शायद इसलिए है कि मल्लिकार्जुन खड़गे को जहाँ गाँधी फैमिली का उम्मीदवार माना जा रहा है तो थरूर को बाहरी कैंडिडेट बताया जा रहा है. दोनों ही उम्मीदवारों के बीच ज़बानी जंग भी जारी है.
इस बीच शशि थरूर ने एकबार फिर पारदर्शिता का सवाल उठाया बल्कि भेदभाव की बात भी की. थरूर ने कहा कि कुछ राज्यों के अध्यक्ष चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यालय पर उनके साथ नहीं रहे जबकि राज्य अध्यक्ष होने के नाते उन्हें तटस्थ होना चाहिए। वहीँ मल्लिकार्जुन काज ने आज एकबार फिर दोहराया कि वो रबर स्टैम्प या रिमोट से कंट्रोल से चलने वाले अध्यक्ष नहीं बनेंगे, उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाती हैं. खड़गे ने फिर दोहराया कि वो अपनी मर्ज़ी से नहीं बल्कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के ज़ोर देने पर अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे हैं . खड़गे ने थरूर के डिबेट चैलेन्ज पर कहा कि संगठन के अंदर डिबेट का क्या औचित्य है, डिबेट ही करनी है तो देश में बढ़ती मंहगाई, बेरोज़गारी, आर्थिक बदहाली, बढ़ती साम्प्रदायिकता पर करनी चाहिए।
वहीँ थरूर ने आज एक पत्रकार वार्ता में अपना दर्द बयान करते हुए कहा कि जिस तरीके से पार्टी नेताओं ने खड़गे साहब के लिए काम किया है उससे भेदभाव उजागर होता है. थरूर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी में 22 साल से चुनाव नहीं हुए इसलिए सिस्टम में बहुत सी कमियां उजागर हुई हैं, उन्होंने कहा कि मुझे मिस्त्री से कोई शिकायत नहीं है. थरूर ने कहा मुझे डेलीगेट्स के बारे में आधी अधूरी जानकारी दी गयी जिससे मैं उनतक संपर्क नहीं कर पा रहा हूँ और मुझे यकीन नहीं कि मैं 17 अक्टूबर तक सभी लोगों से संपर्क कर पाऊंगा इसलिए मैं मीडिया के माध्यम से उन सभी तक पहुँचने की कोशिश कर रहा हूँ.

