पश्चिम की हदों से निकल पूर्वी यूपी में पैर पसार रहा किसान आंदोलन

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पश्चिम की हदों से निकल पूर्वी यूपी में पैर पसार रहा किसान आंदोलन

रश्मि शर्मा

दिल्ली में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन की आंच अब पश्चिम के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी महसूस की जा रही है। कृषि कानूनों के खिलाफ बीते दस दिनों से लगातार पूर्वी उत्तर प्रदेश में किसान पंचायते हो रही हैं और उनमें भीड़ भी जुट रही है। जाट किसानों के नेता माने जाने वाले नरेश टिकैत और राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी इन किसान पंचायतों को संबोधित कर रहे हैं। अब तक रालोद और भारतीय किसान यूनियन ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में लखनऊ, बाराबंकी, बस्ती, अंबेडकरनगर, संकबीरनगर सहित कई जिलों में किसान पंचायतें कर डाली हैं।

अब तक किसान आंदोलन को लेकर पश्चिम में ही सक्रियता दिखा रही कांग्रेस व इसकी प्रभारी महासिचव प्रियंका गांधी भी आने वाले दिनों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में पंचायत का आयोजन करने जा रही हैं। उत्तर प्रदेश में जल्द होने वाले पंचायत चुनावों को देखते हुए किसानों की पूर्वी हिस्से में उभार सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए परेशानी का सबब बन गया है। भाजपा जहां पश्चिम में अपने नेताओं व मंत्रियों को जाटों की खाप पंचायतों से मुलाकात के लिए भेज रही है वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए इस तरह की कोई रणनीति अभी तक नहीं बनायी गयी है। मंगलवार को लखीमपुर जिले के संपूर्णनगर में कृषि कानूनों के विरोध में हुयी पंचायत में रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने केंद्र व प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। जयंत ने कहा कि आजाद भारत का यह पहला आंदोलन है जो जमीन से निकल कर आया है। किसान मतदाता बनकर सवाल पूंछ रहा है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर के गांव में नेता भेजे गएय़ वहां के सोरम गांव में ये नेता गए तो नारे लगे कि किसान एकता जिंदाबाद।

गौरतलब है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कृषि कानूनों के खिलाफ हो रही पंचायतों में किसानों की भीड़ आ रही है। बीते सप्ताह रेल रोको आंदोलन में भी पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों की भागीदारी रही थी। पश्चिम में लगातार इस मुद्दे पर किसान पंचायत कर रही कांग्रेस भी अब पूर्वी हिस्सों में इनका आयोजन करने जा रही है जहां पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी किसानों को संबोधित करेंगी। भकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत पूर्वी उत्तर प्रदेश में अब तक आधा दर्जन किसान पंचायतों को संबोधित कर चुके हैं। मध्य उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच प्रभाव रखने वाले नेता वीएम सिंह ने एक बार फिर से आंदोलन खड़ा करने का एलान कर दिया है। पहले किसान आंदोलन में शामिल रहे वीएम सिंह ने 26 जनवरी को लालकिले पर हुयी घटना के बाद अपने कदम वापस खींच लिए थे। अब वो नए सिरे से आंदोलन में जुटने जा रहे हैं।

उधर अब तक किसानो के आंदोलन को पश्चिम के दस जिलों का बताने वाली भाजपा के सामने नयी चुनौती खड़ी हो गयी है। पार्टी का मानना है कि आने वाले पंचायत चुनावों में किसान आंदोलन के चलते परेशानी खड़ी होगी। जिस तरह से पश्चिम में पार्टी नेताओं के गांव में घुसने पर पाबंदी लगायी जा रही है वही सिलसिला पूर्व में शुरु हो गया तो खासी मुसीबत खड़ी होगी।

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