BuzinessBytes Special : सुरक्षा चूक का राजनीतिकरण

आर्टिकल/इंटरव्यूBuzinessBytes Special : सुरक्षा चूक का राजनीतिकरण

Date:


BuzinessBytes Special : सुरक्षा चूक का राजनीतिकरण

अमित बिश्‍नोई

पीएम हो या प्रेजिडेंट, किसी भी देश के लिए उसकी सुरक्षा सर्वोपरि होती है, क्योंकि उसकी सुरक्षा देश की अस्मिता से जुड़ी होती है. ऐसे ही देश की अस्मिता को खतरा तब पैदा हुआ जब हमारे देश के प्रधानमंत्री पंजाब के एक फ्लाईओवर पर जनता के बीच फंस गए, दूसरे उनसे कुछ ही दूरी पर आंदोलित किसान भी सड़क रोककर खड़े हो गए, बग़ल की लेन में मोदी ज़िंदाबाद के नारे लगाते हुए कथित रूप से भाजपा के कार्यकर्ता जो हाथो में पार्टी का झंडा भी उठाये हुए थे. प्रधानमंत्री को 20 मिनट जनता के बीच फंसे रहना पड़ा। इसे सुरक्षा की बड़ी चूक बताया जा रहा है. केंद्र और राज्य सरकार इस मामले में आमने सामने हैं. राज्य में चुनाव हैं और आज ही चुनाव आयोग ने कार्यक्रम की अधिकारिक घोषणा भी कर दी है जिसके मुताबिक 14 फरवरी को वहां मतदान होना है. तो इस सारे विवाद को राजनीति से अलग करके देखा नहीं जा सकता। वैसे भी हमारे देश में साल के 365 दिन, 24 घंटे राजनीति ही होती है.

दरअसल यह मामला सुरक्षा चूक तक ही सीमित रहता अगर पीएम मोदी “मैं ज़िंदा लौट आया वाला बयान न देते”. हालाँकि इसपर भी अब दो मत हैं कि प्रधानमंत्री ने यह बयान दिया भी है या नहीं। क्योंकि इस बयान की अभी तक न तो पुष्टि हुई है और न ही इससे इंकार किया गया है. लेकिन सियासत तो शुरू ही हो चुकी है. अफ़सोस होता है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक जैसा गंभीर मसला इस तरह चुनावी राजनीती की भेंट चढ़ गया.

Read also: महादेव की नगरी से मोदी के बाद अब श्रीराम की नगरी से योगी लड़ सकते हैं चुनाव?

खैर जांचें शुरू हो चुकी हैं, DGP को हटाया जा चूका, भले ही कारण कोई भी बताया जा रहा हो, केंद्र की टीम भी पंजाब पहुँच चुकी है,पंजाब के बड़े अधिकारीयों को होम मिनिस्ट्री समन जारी कर चुकी है. सुप्रीम कोर्ट भी दखल दे चूका है, कई टीवी चैनल पीएम के दौरे के लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट हाथ लगने का दावा कर रहे हैं. कुल मिलाकर सुरक्षा चूक के कारण देश ठहर चूका है और इस बहस में फंस चूका है कि यह सुरक्षा चूक है या चुनावी चूक.

इस मामले में जांच एजेंसियां अपना काम करेंगी हालाँकि जो एजेंसियां जांच कर रही हैं वह खुद सवालों के घेरे में हैं, इसलिए जब इनकी रिपोर्ट आएगी तो उसपर भी जमकर सियासत होगी। देखना यह होगा कि यह रिपोर्ट विधानसभा चुनावों के बाद आएगी या इन चुनावों के बीच. उम्मीद तो यही है कि चुनावों के बीच ही आएगी, तारीख का अंदाज़ा आप लगा सकते हैं. चुनाव आयोग ने पूरा कार्यक्रम घोषित कर दिया है.

अब जबकि प्रधानमंत्री की सुरक्षा चूक का राजनीतिकरण हो ही चूका है तो बता दें कि यह मुद्दा भले ही भाजपा की तरफ से उछाला जा रहा हो लेकिन कांग्रेस भी इस मुद्दे को आपदा में अवसर बनाने तैयारी में है. जिस तरह से पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने इसे पंजाबियत और पंजाब की अस्मिता से जोड़ दिया है, वह कारगर हथियार साबित होने वाला है. देश हो या राज्य, जब बात अस्मिता की आती है तो विरोधी भी अपने हो जाते हैं. अस्मिता का मुद्दा गुजरात में आज तक काम कर रहा है, हर छोटे बड़े चुनाव में गुजरात की अस्मिता की दुहाई दी जाती है. पंजाब भी जियाले और जोशीले लोगों का प्रदेश है. देश के लिए जान निछावर करने वालों में सबसे आगे. कांग्रेस पार्टी उनसे अपनी अस्मिता की रक्षा करने की अपील कर रही है. पंजाबियत की हिफाज़त करने का आह्वान कर रही है.

Read also: प्रधानमंत्री की सुरक्षा में हुई चूक मामले में सोनिया गांधी ने पंजाब सीएम चन्नी से बात की

दरअसल इस तरह के दांव पेंच के लिए भारतीय जनता पार्टी माहिर मानी जाती है मगर पिछले सात सालों में दूसरी पार्टियों ने बीजेपी से काफी कुछ सीखा है, विशेषकर चुनाव को लेकर। बहरहाल चुनाव अपनी जगह और प्रधानमंत्री की सुरक्षा अपनी जगह. मोदी जी भाजपा के नहीं बल्कि पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं इसलिए अगर कोई सुरक्षा चूक हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच ज़रूर है। कम से कम पता तो चले कि यह वाकई सुरक्षा चूक है चुनावी चूक.

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related