देहरादून। शिक्षा विभाग में कार्यरत इकलौते बेटे को अतिदुर्गम क्षेत्र से सुगम इलाके में भेजे जाने की मांग को लेकर 90 साल का बुजुर्ग बीमार पिता देहरादून में विधानसभा के सामने अनशन पर बैठ गया। जब सब ओर से गुहार लगा चुका और कहीं से कोई आश्वासन नहीं मिला तो बुजुर्ग ने यह कदम उठाया है। पुलिस ने धरने पर बैठै बुजुर्ग का टेंट गिराकर हटाने का प्रयास किया लेकिन वह अपने परिवार के साथ ही धरने पर डटा रहा। इसके बाद जब मौके पर तहसीलदार पहुंचे और उन्होंने बुजुर्ग से पूरी बात सुनी तो बेटे का स्थानांतरण कराने के आश्वासन पर अनशन खत्म किया।
श्रीनगर के अपर भक्तियाना निवासी 90 साल के बुजुर्ग राज्य आंदोलनकारी गिरधारी लाल नैथानी ने बताया कि उन्होंने बेटे के स्थानांतरण के लिए पहले भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर गुहार लगाई थी। नैथानी ने बताया कि उन्होंने अपने पत्र में अपनी बीमारी व उम्र का हवाला देते हुए बेटे का स्थानांतरण सुगम इलाके में करने की मांग की थी। उन्होंने बताया कि उनका इकलौता बेटा देवेंद्र कुमार है। देवेंद्र कुमार पिछले 12 साल से राजकीय इंटर कॉलेज सननौल, उत्तरकाशी में तैनात है। जो कि अति दुर्गम क्षेत्र में आता है।
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बेटे के सुगम इलाके में तबादले से संबंधित मामले में वो शिक्षा निदेशक कार्यालय से लेकर शिक्षामंत्री व सीएम धामी तक से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन जब कहीं से कोइ सुनवाई नहीं हुई तो मजबूरन आमरण अनशन को मजबूर होना पड़ा है। आमरण अनशन में गिरधारी लाल के साथ उनकी पत्नी सुधा व लीलानंद पेटवाल भी बैठे हैं। देर शाम तहसीलदार सोहन सिंह ने मौके पर पहुंचकर उनसे ज्ञापन लिया और शिक्षा मंत्री से फोन पर बात कराई। जिसके बाद उन्हें सकारात्मक आश्वासन मिला है। अब उन्हें आज शुक्रवार को ननूरखेड़ा स्थित निदेशालय बुलाया है। आश्वासन मिलने के बाद नैथानी भले ही अनशन से उठ गए हो लेकिन चेतावनी दी है कि अगर एक हफ्ते में उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वो फिर से आमरण अनशन पर बैठेंगे। इससे पहले नैथानी ने जानकारी दी कि वो पुत्रवधू सुभाषिनी के साथ जौलीग्रांट में स्वर्णभूमि, नंदा कॉलोनी में निवास करते हैं। नैथानी ने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी। कई बार जेल गए हैं। नैथानी ब्लड प्रेशर के अलावा शुगर और हृदय रोग से पीड़ित हैं। उनका इलाज जौलीग्रांट में चल रहा है इसलिए वह वहीं रहते हैं।

