Student committed suicide in Kota: देश भर में कोटा का नाम इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए जाना जाता है। लेकिन वहीं अब कोटा का नाम एक और चीज के लिए खतरनाक हो रहा है। कोटा में आईआईटी और अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने जाने वाले छात्रों में आत्महत्या की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। देशभर में कोचिंग हब के रूप में कोटा जाना जाता है। लेकिन यहां पर अब छात्रों के मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। एक के बाद एक छात्र आत्महत्या कर रहे हैं। आए दिन बच्चों की मौत अन्य छात्रों के अलावा कोटावासियों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। हाल में 18 वर्षीय छात्र वाल्मीकि जांगिड़ ने आत्महत्या की। बिहार निवासी वाल्मीकि पिछले साल से इंजीनियरिंग में दाखिला लेने के लिए ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (JEE) की तैयारी कर रहा था।
एक महीने में यह तीसरी खुदकुशी की घटना
कोटा में एक महीने में यह तीसरी खुदकुशी की घटना है। अगस्त में तीन छात्रों ने खुदकशी की है। जनवरी से अगस्त तक में 22 छात्रों ने खुदकुशी कर मौत को गले लगाया है। इनमें 14 छात्रों को कोटा आए हुए मात्र तीन से छह माह से कम समय हुआ था। जबकि आठ बच्चों ने तो डेढ़ महीने से लेकर पांच महीने के पहले कोटा में कोचिंग में दाखिला लिया था। इनके अलावा दो मामले आत्महत्या की कोशिश के सामने आए हैं। सवाल है कि आखिर क्यों कुछ महीने पहले आए बच्चे आत्महत्या करने को मजबूर होते हैं?
अभिभावकों की उम्मीदें छात्रों पर बनी बोझ
कोटा में साल भर में जितने बच्चों ने अब तक आत्महत्या की है उनमें से अधिकांश छात्रों के गिनती मेधावियों में होती थी। सभी छात्रों ने अपने स्कूलों में अच्छे अंक प्राप्त किए। एक या दो बच्चों को छोड़े दे तो अधिकांश बच्चों के नंबर 80 प्रतिशत से ऊपर थे। शिक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर कोई छात्र स्कूल में 75 से अधिक फीसद अंक हासिल करता है तो अभिभावक सोचते है कि उनका बच्चा आईआईटी, मेडिकल या बड़ी सरकारी एग्जाम की तैयारी करने लायक है। इसके बाद अभिभावक बड़े चकाचौंध वाले बड़े शहरों के कोचिंग सेंटर में दाखिला दिलवाते हैं। घर-परिवार और रिश्तेदारों से दूर उन्हें हॉस्टल में अकेला छोड़ते हैं। ऐसी जगह बच्चों की स्पर्धा देशभर के अन्य टॉपरों से होती है। इसके कारण उन पर पढ़ाई का दबाव बनता रहता है। कुछ छात्र इस पढ़ाई के प्रेशर को सहन करते है तो कुछ बच्चों पर यह बोझ बनती है।
आत्महत्या के लिए अपना रहे है ‘डबल मेथड’
जानकारों की माने, आत्महत्या करने वाले छात्रों के कई तरह के सुसाइड नोट्स से इशारा मिलता है कि अभिभावकों का अपने बच्चों पर दबाव के अलावा एंग्जायटी और दूसरे छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा छात्रों मौत की बड़ी वजह बनी है। बड़े शहरों में पढ़ाई कर रहे बच्चे दबाव में आते हैं कि वे अपनी मौत का सबसे खौफनाक तरीका चुनते हैं। इनमें एक है- डबल मेथड। इस सुसाइड के ऐसे तरीके से जान दी जाती है। जिसमें किसी भी तरह जिंदा बचने की गुंजाइश नहीं रहे। अगर फंदे से बच जाए तो किसी और तरीके से निश्चित मौत हो जाए।
