Site icon Buziness Bytes Hindi

2022 उत्तराखंड विधानसभा चुनाव: साधु संतों के आगे भी नतमस्तक होती रही राजनीति,अखाड़ों मेें सिर झुकाते रहे नेता


2022 उत्तराखंड विधानसभा चुनाव: साधु संतों के आगे भी नतमस्तक होती रही राजनीति,अखाड़ों मेें सिर झुकाते रहे नेता

देहरादून। 2022 उत्तराखंड विधानसभा चुनाव – धर्म और राजनीति का आपस में बड़ा गहरा नाता है। धर्म के बिना राजनीति नहीं चल सकती जबकि राजनीति के बिना धर्म चल सकता है। जब से धर्म का जन्म हुआ तभी राजनीती भी जन्मी। पहाड़ की राजनीति में धर्म का बड़ा महत्व है। यहां की राजनीति हमेशा से धर्म के आगे नतमस्तक रही है। यहीं कारण है कि जब भी चुनाव आते हैं। साधु संतों के अखाड़ों में नेता भक्तों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। नेता टिकट के लिए इन साधु संतों से पार्टियों पर दबाव डलवाते रहे हैं। दल भाजपा हो या फिर कांग्रेस दोनों का अंखाडों और आश्रम में बराबर कर दखल रहता है। अखाडों और आश्रम की छत्रछाया पाने के लिए दोनों दल के नेता आतुर रहते हैं। टिकट मिल गया तो फिर विजय होने का अर्शिवाद पाने के लिए भी संतों के पास जाना जरूरी होती है। पहाड़ में संतों से राजनीतिज्ञों की निकटता कोई नई नहीं है। यह रिश्ता बड़ा पुराना है। धर्मनगरी हरिद्वार हो या फिर बदरी नाथ या केदारनाथ का दरबार। यहां पर माथा टेकने वाले राजनीतिज्ञों की कोई कमी नहीं है। ऐसा नहीं है कि यहां पर पहाड के ही प्रत्याशी या राजनीतिज्ञ आर्शिवाद लेने आते हों। यहां पर दूसरे राज्यों से भी प्रत्याशी चुनाव के दौरान विजयी होने का अर्शिवाद लेने के लिए अख़ाडों और आश्रम के चक्कर काटते हैं। इन अखाड़ों में प्रत्याशी के विजयी होने के लिए अनुष्ठान और यज्ञों का दौर भी शुरू हो चुका है। अखाडों और आश्रमों के मंदिरों में बैठकर यज्ञ का कार्य शुरू हो चुका है। प्रत्याशी अपनी विजय के लिए पंडितों से अनुष्ठान भी करा रहे हैं।

Read also: यूपी विधानसभा चुनाव : बसपा ने सोशल मीडिया के जरिए उठाया मुद्दा

पहाडा के संत हो या फिर यहां के आश्रम और मठ सभी का राजनीति में बराबर दखल रहा है। खासकर हरिद्वार के आश्रम और अखाड़ों में तो पूरे साल राजनीतिज्ञों का आना जाना लगा रहता है। हरिद्वार में ऐसे अखाड़े और आश्रम हैं, जहां के साधु संत और महंत को नेता अपना गुरु या मुख्य सलाहकार माना करते हैं। इसी के चलते कारण राम मंदिर आंदोलन के लिए उत्तरी ​हरिद्वार और कनखल के आश्रमों में पूरी योजना तैयार की गई। इनमें स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती, कैलाशानंद सरस्वती,स्वामी अवधेशानंद गिरि,स्वामी परमानंद सरस्वती,धर्मानंद सरस्वती,डॉॅ. प्रणव पंड्या,सत्यमित्रानंद गिरी जैसे कुछ नामी संतों पुरुषों के नाम सामने हैं। इन सभी का राजनैतिक प्रभाव किसी से छिपा नहीं है। इनका राजनैतिक प्रभाव सभी दलों में हैं।

Exit mobile version