Zeba Hasan
इंसानों के लिए कहते हैं कि हम सभी आदम की औलाद हैं, लेकिन क्या दशहरी आम के लिए भी ऐसा कहा जा सकता है? तो जवाब है हां। जी हां चीन से जापान, इंग्लैंड, अमेरिका यानी दुनिया के किसी कोने में भी अगर दशहरी आम है तो उसका एक ही आदमी है और वो है काकोरी के दशहरी गांव में। साइंटिस्ट इसे दशहरी का मदर ट्री कहते हैं तो किसान इसे दशहरी के बाबा नाम से पुकारते हैं। अगर इस पेड़ को अलग-अलग नाम से जाना जाता है तो इसके जन्म की कहानियां भी कई अलग अलग हैं।
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संत की गुठली का चमत्कार
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगे काकोरी में एक बेहद छोटा सा गांव मौजूद है, जिसका नाम दशहरी है। इसी गांव में आम का पहला पेड़ मौजूद है जिस पर पहला दशहरी आम आया था। दशहरी गांव के नाम पर ही इस आम का नाम भी दशहरी पड़ा। गांव वालों का कहना है कि इस गांव में कभी एक संत आए थे, उन्होंने कुछ खाकर यहां गुठली फेंकी थी तभी यह आम का पेड़ निकला और फिर गांव का नाम भी दशहरी पड़ गया। लोगों ने इसी पेड़ की कल्मों से ही दुनिया के हर कोने में दशहरी को पहुंचाया है। वहीं गांव के ही एक बुजुर्ग ने बताया कि यह पेड़ तो चमत्कार है अपने आप ही निकला था। हालांकि कुछ गांव वालों का कहना है कि दशहरी आम का पहला पेड़ लगाने के श्रेय नवाब मोहम्मद अंसार अली को जाता है। उनके परिवार के वंशज आज भी इस पेड़ के मालिक हैं। 200 साल पुराने इस पेड़ पर आने वाले आमों को सबसे पहले नवाब अंसार अली के परिवार को भेजा जाता है।
सही उम्र कोई नहीं जानता
इस पेड़ की उम्र लगभग 200 साल से बताई जाती है। जानकार बताते हैं कि पहले लखनऊ जाने का यही रास्ता हुआ करता था। एक बार फकीर मोहम्मद खान जो उस वक्त अवध के नवाब के सिपहसालार हुआ करते थे, वह इसके नीचे आराम करने के लिए रुके। इस दौरान उन्होंने इस पेड़ से आम को तोड़कर खाया जो उनको बहुत पसंद आया। वह इस पेड़ की कलम को अपने साथ लेकर मलिहाबाद गए थे जहां यह आम खूब फलने लगा। 70 साल की राजरानी ने बताया कि यह पेड़ कितना पुराना है इसके बारे में कोई नहीं जानता। यहां के सबसे बुर्जग व्यक्ति ने भी यही कहा कि यह तो हमारे बुजुर्ग भी नहीं बता पाए है कि यह पेड़ कितना पुराना है। करीब 60 साल की उम्र के दन्ना ने बताया कि जब इस पेड़ के बारे में हमारे दादा जी कहते थे कि पता नहीं कितना पुराना है तो हम कैसे बता दें।
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बुढ़ापे ने बढ़ा दी खूबसूरती
कहते हैं ओल्ड इज गोल्ड और ऐसा ही है काकोरी की पहचान बनने वाला दशहरी का मदर ट्री। मोटे तने से शुरू हुई शाखाएं इस पेड़ की उम्र को बयां करती हैं। करीब सौ तनों वाले इस पेड़ में इस वक्त करीब बीस हजार आम लदे होंगे। हालांकि लोगों की अगर माने तो इसकी मेंटेनेंस कम होने के चलते इसका फल कुछ छोटा हो गया है।लेकिन वो कहते हैं न कि मां तो मां ही होती है हर दशहरी से कुछ खास इसका जायका लोगों को अलग ही लगता है।

