माइग्रेन व्यक्ति को दुर्बल करने वाली स्थिति है, इस स्थिति में प्रकाश की चमक, हाथ-पैर में झनझनाहट, उलटी, प्रकाश और ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि जैसे चेतावनियों का अनुभव करना पढ़ता है | इसके अलावा ठंड लगना, पसीना आना, तापमान में बदलाव, पेट में दर्द और दस्त भी अन्य लक्षणों में से है |
आज हम आपको इस लेख के माध्यम से कुछ तरकीबों और तकनीकों के बारे में बताएंगे, जो माइग्रेन में राहत प्रदान कर सकती हैं। माइग्रेन को नियंत्रित करने के लिए योग में कुछ सरल और प्रभावी तरीके हैं।
भस्त्रिका प्राणायाम
इसमें पहले आपको किसी आरामदायक आसन में बैठना है, फिर पीठ सीधी करके आंखें बंद कर लेनी है | अब हथेलियों को घुटनों पर ऊपर की तरफ रखे और ग़हरी श्वास लें, छोड़ें। ध्यान दे की सांस लेना और छोड़ना 1:1 के अनुपात में होना चाहिए |
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ब्रह्मरी प्राणायाम
इसमें भी आपको पहले किसी आरामदायक आसन पर बैठना है और पीठ को सीधा करके आँखें बंद कर लेनी है | अब हथेलियों को घुटनों पर ऊपर की तरफ रखे और अंगूठे को ‘ट्रैगस’ पर रखें, बाहरी फ्लैप कान पर। अब तर्जनी को माथे पर रखें, मध्यमा उंगली को मेडियल कैन्थस पर और अनामिका नथुने को कोने पर | अब ग़हरी श्वास लें, छोड़ें।
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योग तनाव मुक्त रहने में मदद करती है और ये माइग्रेन की स्थिति को ठीक करने का कार्य भी करती है | शारीरिक या भावनात्मक तनाव माइग्रेन के दौरे का कारण बन सकती है, इसीलिए नियमित अभ्यास से आप हर दिन तरोताजा हो जाएंगे |

