अमित बिश्नोई
इतना दुःख, इतनी निराशा विनेश को तब भी नहीं हुई होगी जब जंतर मंतर पर आंदोलन के दौरान और आंदोलन के बाद उसे चुकी हुई खिलाड़ी बताया गया, विपक्ष की कठपुतली बताया गया, दूसरों से पैसा लेकर आन्दोलन करने वाला बताया गया, दुनिया भर में भारत की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाला राष्ट्रद्रोही बताया गया, जितना दुःख और निराशा भारत की इस बेटी को कल उस समय हुई जब उससे उसका ओलम्पिक मेडल का सपना छीन लिया गया. पिछले दो ओलम्पिक से वो लगातार कोशिश करती आ रही थी कि उसके पास ओलम्पिक मेडल आ जाय, ये उसकी तीसरी कोशिश थी और बहुत संघर्षों के बाद ही उसे भारतीय दल में जगह मिल पायी थी, संघर्ष उसका पेरिस में भी था, उसे बहुत तगड़ा ड्रा मिला था मगर उसने उन रुकावटों को भी पार कर लिया। अब बस सामने उसके गोल्ड नज़र आ रहा था क्योंकि सिल्वर तो उसकी झोली में आ ही चूका था मगर तभी उसपर वज्रपात हुआ क्योंकि उसे फाइनल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया.
एक दिन पहले, या फिर कहिये कि कुछ घंटों पहले विनेश की कामयाबियों से देश झूम रहा था, कुछ समयांतर में उसने तीन मुकाबले जीते थे जिसमें दुनिया की नंबर एक रेसलर के खिलाफ मुकाबला भी था जो इससे पहले 82 मुकाबलों में एक भी मुकाबला नहीं हारी थी और कहा जा रहा था कि विनेश का ओलम्पिक सफर पहले ही मैच में ख़त्म हो जायेगा लेकिन विनेश ने अनहोनी को होनी कर दिखाया और मुकाबला जीतकर दुनिया को हैरान कर दिया, अगले मुकाबले में उसने यूरोपियन चैंपियन को हराकर सेमीफइनल में प्रवेश किया और कुछ ही घंटों बाद फाइनल में प्रवेश हासिल कर महिला भारतीय कुश्ती में एक इतिहास रच दिया। इन ताबड़तोड़ कामयाबियों से पूरा देश झूम रहा था, बधाइयों का ताँता लगा था, ये अलग बात है कि इन बधाइयों में प्रधानमंत्री मोदी की बधाई नहीं शामिल थी. क्यों शामिल नहीं थी ये तो प्रधानमंत्री ही बता सकते हैं बाकी बीते समय में जंतर मंतर पर महिला पहलवानों के साथ क्या हुआ ये पूरा देश जानता है. देश के 140 करोड़ लोग 6 अगस्त को मीठी यादों के साथ सोये क्योंकि दुसरे दिन उन्हें महिला कुश्ती में भारत को पहला गोल्ड मैडल मिलता हुआ नज़र आ रहा था. लेकिन सुबह जब लोगों की नींद खुली तो ये मनहूस खबर लोगों को मिली कि विनेश को फाइनल के लिए डिसक्वालिफाई कर दिया गया है.
इस खबर के मिलते ही देश में हंगामा मचना लाज़मी था क्योंकि विनेश को सिर्फ 100 ग्राम बढे वज़न की वजह से मुकाबले से बाहर किया गया था. सिर्फ 100 ग्राम, लोगों को यकीन नहीं हुआ, होता भी कैसे, कोई कैसे यकीन कर सकता है कि इतना बड़ा भारतीय दल, इतने मंहगे कोच, सपोर्ट स्टाफ, डॉक्टर, न्यूट्रीशियंस 100 ग्राम वजन को मैनेज नहीं कर पाए. बात संसद से साज़िश तक पहुँच गयी जोकि लाज़मी था, इतिहास में विनेश के साथ क्या क्या हो चूका था, उसके तार तो इस 100 ग्राम की घटना से जुड़ने ही थे. साज़िश की बात सबसे पहले विनेश के चाचा ने की और फिर विपक्षी दलों के नेताओं ने. सत्ता पक्ष को एक्टिव होना पड़ा, मगर उनकी पहली प्रतिक्रिया एक्शन से ज़्यादा सफाई थी। खेलमंत्री ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में यही बताया कि विनेश पर इस ओलम्पिक में भारी रकम खर्च की गयी. तो पहला सवाल यही है कि विनेश को तैयार करने के लिए, उसकी देखभाल करने के लिए जिनपर ये रकम खर्च की गयी वो विनेश का 100 ग्राम वज़न न कम करा सके, उन्हें इतना भी पता नहीं कि विनेश जब वजन के लिए जा रही थी तो ओवर वेट थीं। ये कैसी तैयारी थी, ये कौन लोग थे जिसने विनेश के साथ एक तरह से धोखा किया।
बजरंग पुनिया के मुताबिक अधिकारीयों ने एक दिन पहले जब वजन किया तो सबकुछ नार्मल था, फिर ऐसा क्या हुआ. बड़ा सवाल है ये कि ऐसा क्या हुआ. किसकी गलती है? कौन ज़िम्मेदार है? और क्या वाकई में विनेश के साथ कोई साज़िश हुई है. गलती तो कहीं से हुई है, किसी से हुई है, देर सबेर वो बात सामने आ ही जाएगी। भारतीय दल के चीफ मेडिकल ऑफिसर फोगट के वजन बढ़ने के जो कारण बता रहे हैं वो सभी को मालूम हैं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर का हर पहलवान जानता है कि वजन अचानक कैसे बढ़ता है, उसे ये भी मालूम है कि इस स्थिति से कैसे बचा जाता है। भारतीय दल ने बताया कि पूरी रात मेहनत की गयी, कपड़े छोटे किये गए, बाल भी काटे गए फिर भी 100 ग्राम मैनेज नहीं हुआ. 100 ग्राम कोई इतना वज़न नहीं है जिसे मैनेज नहीं किया जा सकता। फोगट की बाल काटने के बाद की जो तस्वीरें सामने आयी उसमें उनके बाल छोटे दिख रहे हैं फिर भी इतने बाल सर पर ज़रूर थे कि अगर फोगट के बाल ट्रिमर से उड़ा दिए जाते तो 100 ग्राम से कहीं ज़्यादा वज़न कम हो सकता था. शायद फोगट के स्टाफ ने ये मान लिया था कि ओवरवेट मैनेज हो चूका है और लास्ट मोमेंट पर उन्होंने नहीं वेट करना मुनासिब नहीं समझा। अब उनकी सफाई का कोई मतलब नहीं। विनेश ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट से अपील की है कि उसका सिल्वर मेडल उसे दिया जाय. देखा जाय तो मांग जायज़ है लेकिन नियम ऐसे करने से रोकते हैं और खेल नियमों से चलता है। एक पल को मान भी लें कि विनेश को सिल्वर मैडल मिल भी जाय मगर जो कुछ हुआ है वो भुलाया नहीं जा सकता। देश की एक होनहार बेटी टूट चुकी है, उसने अपने जूते टांग दिए हैं, वो अब कुश्ती के मैट पर नज़र नहीं आएगी, इसका ज़िम्मेदार हम किसे ठहराएंगे। पता तो लगाना ही होगा कि इस 100 ग्राम की साज़िश के पीछे कौन हैं।
