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सुप्रीम कोर्ट का फैसला, आर्टिकल 370 हटाना संवैधानिक रूप से सही

Supreme Court's decision, removal of Article 370 is constitutionally correct

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाना संवैधानिक रूप से सही है। केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में पांच जजों की पीठ ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को राहत देते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा है इसलिए विशेष राज्य दर्जा हटाने का फैसला सही है और ये बरकरार रहेगा।

CJI चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के खिलाफ दायर चायिकाओं पर अलग-अलग जजों की ओर से 3 फैसले हैं जिसमें पहला फैसला चीफ जस्टिस का है, दूसरा जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत का। इन दोनों फैसलों से जस्टिस संजीव खन्ना सहमत हैं वहीँ जस्टिस एमके कौल की एक अस्थायी सोच है। चीफ जस्टिस ने जम्मू-कश्मीर में 2018 के दिसंबर महीने में लगाए गए राष्ट्रपति शासन पर कोई भी जजमेंट देने से मना कर दिया, कहा गया कि इस विषय पर याचिका दाखिल नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने माना किया कि जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा भंग होने के बाद राष्ट्रपति के पास आर्टिकल-370 समाप्त करने का अधिकार है और इससे संबंधित अधिसूचना भी जारी करने की पॉवर भी है।

फैसले में शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर में विशेष राज्य दर्जा आर्टिकल 370 विघटन नहीं बल्कि एकीकरण के लिए था। ऐसे में राष्ट्रपति अनुच्छेद 370 को हटाने का ऐलान कर सकते हैं। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि युद्ध के हालात में जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त था। यह आर्टिकल-370 सिर्फ एक अस्थाई प्रावधान था। आर्टिकल 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने लद्दाख के पुनर्गठन को भी सही माना और इसे बरकरार रखने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अगले साल 30 सितंबर 2024 तक चुनाव आयोग को जम्मू कश्मीर में इलेक्शन कराने के निर्देश दिए हैं।

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