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Motion of thanks: दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज में होगा कांग्रेस के पतन पर शोध, संसद में पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जहाँ कांग्रेस नेता राहुल गाँधी का जमकर उपहास उड़ाया वहीँ कांग्रेस के साथ खड़ी हुई विपक्षियों पार्टियों को टुकड़े टुकड़े गैंग बताया। इस दौरान दुष्यंत कुमार की कुछ लाइनों के द्वारा बताया कांग्रेस के पाँव के नीचे ज़मीन खिसक चुकी है. अपने भाषण के दौरान उनके निशाने पर कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी ही रहे और उनकी कही गयी बातों का जवाब उपहासजनक अंदाज़ में दिया। हालाँकि पूरे भाषण के दौरान राहुल गाँधी के अडानी पर पूछे गए सवालों पर वो चुप्पी साधे रहे.

पाँव के नीचे ज़मीन नहीं

राहुल की हावर्ड यूनिवर्सिटी में अडानी और मोदी को लेकर स्टडी वाली बात पर प्रधानमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में कांग्रेस के पतन को लेकर पहले ही एक स्टडी हो चुकी है और उन्हें भरोसा है कि भविष्य में कांग्रेस की बर्बादी पर और कांग्रेस को डुबोने वालों पर सिर्फ हार्वर्ड ही नहीं बल्कि दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज में स्टडी होनी है. इस बीच उन्होंने कवि दुष्यंत कुमार का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनकी यह लाइनें “तुम्हारे पांव के नीचे कोई जमीन नहीं, कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं” बिलकुल फिट बैठती हैं. प्रधानमंत्री ने इसके बाद काका हाथरसी के एक दोहे को उद्धृत करते हुए कहा कि जिसकी जैसे भावना होती है उसे वैसा ही दिखता है.

मिले सुर मेरा तुम्हारा, विपक्ष पर निशाना

विपक्षी एकता पर कटाक्ष करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बहुत सारे विपक्षी मिले-सुर मेरा-तुम्हारा गए रहे थे. उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा लगता था लगता था कि देश के चुनाव के नतीजे उन्हें जरूर एक मंच पर लाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ मगर ED की वजह से यह लोग ज़रूर एक मंच पर इकट्ठा हो गए और इसके लिए विपक्ष को ED का शुक्रिया अदा करना चाहिए।

दुनिया को दिख रही है भारत की तरक्की

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग देश की प्रगति को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे लोगों को भारत की तरक्की दिख ही नहीं रही है. यह लोग कल बहुत उछल रहे थे, इन्हें 140 करोड़ लोगों के सामर्थ्य का फल नहीं नजर आ रहा है लेकिन पूरी दुनिया को नज़र आ रहा है, वो भारत की समृद्धि में अपनी समृद्धि देख रही है. लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग निराशा में डूबे हुए हैं.

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