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मणिपुर में मानवाधिकारों के हनन पर अमरीकी रिपोर्ट को भारत ने किया ख़ारिज

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भारत ने 25 अप्रैल को मणिपुर में मानवाधिकारों के हनन के मामलों पर अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी एक रिपोर्ट को खारिज कर दिया और इसे पक्षपातपूर्ण बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा, “यह रिपोर्ट बेहद पक्षपातपूर्ण है हम इसे कोई महत्व नहीं देते हैं .

23 अप्रैल को अमेरिका ने मानवाधिकार प्रथाओं पर देश रिपोर्ट पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि जातीय संघर्ष के फैलने के बाद मणिपुर में महत्वपूर्ण मानवाधिकारों का हनन हुआ। विदेश विभाग नेअपनी रिपोर्ट में कहा, “भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में कुकी और मैतेई जातीय समूहों के बीच जातीय संघर्ष के फैलने के परिणामस्वरूप महत्वपूर्ण मानवाधिकारों का हनन हुआ। रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि 3 मई से 15 नवंबर के बीच 175 लोगों की हत्याएं हुई और 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए।

स्टेट सेक्रेटरी एंथनी ब्लिंकन द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (बीबीसी) के कार्यालय पर कर अधिकारियों द्वारा छापे और गुजरात की एक अदालत द्वारा राहुल गांधी को दोषी ठहराए जाने और दो साल की जेल की सजा का भी उल्लेख किया गया है। गुजरात दंगों पर बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री का हवाला देते हुए विदेश विभाग ने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया, मीडिया संस्थानों को डॉक्यूमेंट्री के वीडियो के लिंक हटाने के लिए मजबूर किया और स्ट्रीमिंग का आयोजन करने वाले छात्रों को हिरासत में लिया।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने नामित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नून के मुद्दे को भी संबोधित किया और कहा कि मामले के विभिन्न पहलुओं को देखने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। पिछले साल अमेरिका ने आपराधिक सांठगांठ और अमेरिकी धरती पर पन्नुन की हत्या के प्रयास को लेकर सुरक्षा चिंताएं जताई थीं।

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