Congress Rahul Gandhi: राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी नहीं लेने की असली वजह !

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नई दिल्ली। देश में आजादी के बाद से 90 के दशक तक अपने स्वर्णिम काल में रहीं कांग्रेस आज खत्म के होने के कगार पर पहुंच चुकी है। राजनैतिक जानकारों की माने तो कांग्रेस को खत्म करने में उनके अपने नेताओं का ही हाथ है। जो पार्टी तीन साल से अपना अध्यक्ष नहीं चुन पाई वो आगे चुनाव की तैयारी क्या करेगी। ऐसा जानकारों का मानना है। बता दें कि कांग्रेस में नए अध्यक्ष की तलाश 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही चल रही है। जो कि आज तक जारी है। इस साल उदयपुर में हुए कांग्रस के चिंतन शिविर में अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए तैयारियां ख़त्म करने की डेडलाइन सितंबर तय की गई है। ये डेडलाइन भी अब सिर पर आ गई है। लेकिन कांग्रेसियों की तलाश ख़त्म होती नज़र नहीं दिख रही है। 

राजस्थान मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने जयपुर में कहा कि अगर राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष नहीं बनते तो कांग्रेस कार्यकर्ता निराश होंगे। लाखों कार्यकर्ताओं की भावना को समझकर राहुल गांधी को अध्यक्ष पद स्वीकार करना चाहिए। साफ़ है कि कांग्रेसी राहुल गांधी के नाम पर अटके हुए हैं और राहुल गांधी अध्यक्ष पद स्वीकार करने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं। सवाल उठता है कि राहुल गांधी अखिर अध्यक्ष पद स्वीकार करने से पीछे क्यों हट रहे हैं।  कांग्रेस की राजनीति पर करीब से नजर रखने वालों की माने तो राहुल गांधी की हिचक के पीछे बहुत से कारण है। इनमें से कुछ राजनीतिक हैं तो कुछ व्यक्तिगत और कुछ कांग्रेस के कामकाज से जुड़े हुए हैं। 

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2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दिया था। उस समय उन्होंने चार पेज की चिट्ठी ट्वीट की थी। जिसमें कुछ मुद्दे उठाए गए थे। उस चिट्ठी में अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के वजहें गिनाईं थी और कुछ ज़रूरी मुद्दे गिनाए थे। चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि इस प्रक्रिया के लिए कांग्रेस के विस्तार के लिए लोकसभा चुनाव के हार की ज़िम्मेदारी तय की जाने की ज़रूरत है। इसके लिए बहुत से लोग ज़िम्मेदार हैं। लेकिन अध्यक्ष के पद पर रहते हुए उन्होंने ज़िम्मेदारी ली और दूसरों को ज़िम्मेदार ना बताते हुए त्यागपत्र दिया। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे की जिम्मेदारी बताने का मुझे हक हैं। इसका मतलब साफ़ था कि उनके इस्तीफे के बाद उन्होंने चाहा था कि कई और जिम्मेदार पद पर बैठे लोग इस्तीफ़ा दें। लेकिन उनके अलावा कांग्रेस में किसी बड़े नेता ने इस्तीफा नहीं दिया था। राहुल गांधी ने उस पत्र में लिखा था कि मैं व्यक्तिगत तौर पर सीधे प्रधानमंत्री, आरएसएस और उन तमाम संस्थाओं के साथ जिस पर कब्ज़ा कर लिया है। अपने पूरे ज़ज्बे के साथ लड़ा हूं। जिस तरह राफेल घोटाले की बात राहुल गांधी ने उठाई या फिर चौकीदार चोर है को चुनाव में मुद्दा बनाया। इन मुद्दों पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का उस तरह से साथ नहीं मिला जिस तरह से मिलना चाहिए था।  ऐसा लगता है कि यह टीस उनके मन में अभी तक है। जिस पार्टी में बड़े नेताओं को अपनी ज़िम्मेदारी का अहसास तक ना हो। शायद वैसे नेताओं की पार्टी का नेतृत्व राहुल गांधी नहीं करना चाहते है। शायद इसी हिचक के कारण राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष पद की कमान अपने हाथ में नहीं लेना चाहते हैं।

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