Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र में शिवसेना की प्रमुख राजनीति पटाक्षेप के लिए अंदरूनी राजनीतिक परिस्थितियां जिम्मेदार

पॉलिटिक्सMaharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र में शिवसेना की प्रमुख राजनीति पटाक्षेप के लिए...

Date:

नई दिल्ली। उद्धव ठाकरे के इस्तीफे के साथ महाराष्ट्र में शिवसेना की राजनीति में प्रमुख अध्याय का पटाक्षेप हो गया। इसके लिए जिम्मेदार खुद शिवसेना की राजनीति को है। जिसके कारण इस तरह की परिस्थिति पैदा हुईं। उद्धव सरकार के पतन में पार्टी की अंदरूनी राजनीति को सबसे अधिक जिम्मेदार है। जिसके कारण शिवसेना पार्टी के शीर्ष नेता स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। यहीं कारण रहा कि शिवसेना की अंदरूनी राजनीति के कारण ही मामला सरकार के गिरने तक पहुंचा। उद्धव ठाकरे पार्टी के अंदर पनप रहे असंतोष की गहराई भापने में असफल रहे और अपने सबसे करीबी साथियों को गंवा बैठे।

Read also: नया ट्विस्ट: फडणवीस नहीं शिंदे होंगे नए CM, आज ही लेंगे शपथ

शिवसेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा नाम थे। उनका अपना व्यक्तित्व इतना ऊंचा था कि वे जो कहते थे, लोग उसे कानून की तरह मानते थे और उसका पालन करते थे। अपने स्वभाव और राजनीतिक रसूक के चलते बाला साहब ठाकरे कभी किसी से मिलने नहीं जाते थे। भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी जैसे लोगों को उनसे मिलने के लिए समय लेना होता था। शिवसेना को करीब से जानने वालों का मानना है कि बाला साहब ठाकरे की यही स्टाइल उद्धव ठाकरे ने अपनाया। उन्हें जिससे नहीं मिलना होता था, वे उसे लंबा इंतजार करवाते थे। उद्धव ठाकरे का यह राजनीतिक स्टाइल वर्तमान में राजनीतिज्ञों को पसंद नहीं आया। शिवसेना वे सिपहसालार जो मातोश्री से करीबी संबंध को अपनी पूंजी समझकर बाल ठाकरे परिवार के साथ गहराई से जुड़े थे। उनको भी उद्धव ने अपने से दूर रखा। इसी कारण वो पार्टी से भी दूर होते चले गए। शिवसेना के बागी विधायकों ने उद्धव ठाकरे पर यही आरोप लगाए हैं। उद्धव के पास अपने ही विधायकों से मिलने के लिए समय नहीं होता था। उद्धव सरकार में प्रमुख मंत्रियों तक को मुख्यमंत्री से नहीं मिलने दिया जाता था। यह असंतोष धीरे-धीरे उबलता रहा और अंत में शिवसेना टूट के कगार पर पहुंच गई। आरोप है कि उद्धव ठाकरे और मातोश्री पर कुछ लोगों का कब्जा हो गया। इससे मामला बिगड़ता चला गया। उद्धव ठाकरे को बीमारी होने के बाद इस बहाने को एक औपचारिक आधार मिला। लेकिन इसने इस असंतोष को बढ़ाने का ही काम किया। हालात यहां तक पहुंचे कि बाला साहेब के कभी करीबी रहे लोगों को उद्धव ने दरकिनार कर दिया। जिसका नतीजा आज महाराष्ट्र में शिवसेना के राजनीतिक पटाक्षेप के रूप में सामने आया है।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related