मेरठ। अंग्रेजों के जमाने के मेरठ के रेड लाइट इलाके कबाड़ी बाजार का नाम देश के इतिहास के पन्ने में दर्ज है। देह व्यापार के इस बाजार में निवास करने वाली वैश्याओं ने 1857 की आजादी की लड़ाई में बड़ी भूमिका निभाई थी। समय बदला तो इस देह व्यापार पर भी पुलिस का शिकंजा कसा गया। सामाजिक संगठनों के विरोध के चलते हाईकोर्ट ने इस कबाड़ी बाजार के करीब 58 कोठों को बंद करने के आदेश जारी किए। जिसके बाद इन कोठो को बंद कर दिया गया। लेकिन अब देह व्यापार के लिए बदनाम रहे मेरठ के इस कबाड़ी बाजार की पहचान बदलने वाली हैै।
एक बार फिर से यह कबाड़ी बाजार गुलजार होगा। जिस समय यहां पर कोठे बंद कराए गए थे उस दौरान सौ से अधिक देह व्यापार में लिप्त युवतियों और महिलाओं को दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया था। इनमें सबसे अधिक राजस्थान, नेपाल, मध्यप्रदेश आदि राज्यों की लड़कियों थी। मेरठ रेड लाइट एरिया में हाईकोर्ट में सौंपी रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र में 400 महिलाएं व युवतियां थीं। अब इन 58 कोठो के मालिक चाहते हैं कि उनके बंद भवनों को फिर से खोल दिया जाए।
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रेड लाइट एरिया के नाम से पहचाने जाने वाले कबाड़ी बाजार के इन 58 भवनों में अब अन्य कोई कारोबार शुरू हो सकता है। मकान मालिकों ने प्रशासन से ताले खोलने की अनुमति मांगी है। भवन मालिकों का कहना है कि वे अपनी बिल्डिंग अनैतिक कार्य के लिए किराये पर नहीं देंगे। तमाम लोगों के प्रार्थनापत्र आने के बाद जिला उद्धार अधिकारी ने इस संबंध में सिटी मजिस्ट्रेट से मार्गदर्शन मांगा है।

