Gujarat Chunavi Dangal : गुजरात में कांग्रेस इसबार सत्ता में आना चाहती है और भाजपा को मात देकर अपना 27 वर्षो का वनवास खत्म करना चाहती है। वही जब से गुजरात कांग्रेस के पाटीदार समाज के नेता हार्दिक पटेल ने पार्टी को अलविदा कहा है पार्टी लगातार इस समाज के लिए मजबूत विकल्प के तौर पर नरेश पटेल को तैयार करने में जुटी हुई है क्योंकि कांग्रेस नरेश को अपने खेमे में करने अपनी पार्टी को मजबूत देख रही है। हालांकि नरेश पटेल कांग्रेस का हिस्सा बनेंगे या नहीं यह फैसला नरेश के हाँथ में है।
जाने क्या है माधवसिंह सोलंकी की खाम रणनीति;-
लेकिन कांग्रेस उदयपुर में हुए चिंतन शिविर के बाद काफी एक्टिव हो गई है और अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए हर समाज की ओर अपने पैर पसार रही है। गुजरात कांग्रेस का फोकस गुजरात में ओबीसी, दलित, पाटीदार व अल्पसंख्यक समुदाय पर है। वही वह गुजरात में इन समाज को ध्यान में रखते हुए बड़ा दांव खेल सकती है।
वैसे तो कांग्रेस की यह यह रणनीति पूर्व मुख्यमंत्री माधव सिंह सोलंकी की खाम (क्षत्रिय, दलित, आदिवासी और मुस्लिम) थियरी जैसी ही है। वर्ष 1985 में कांग्रेस ने इस समीकरण से रिकार्ड 149 सीट जीत ली थी और गुजरात मे अपना दबदबा बनाया था।
लेकिन अब एक बार पुनः गुजरात में कांग्रेस ने इसी समीकरण के साथ आगे बढ़ने की ठान ली है और अगर गुजरात मे कांग्रेस की यह नीति काम कर गई तो इस बार भाजपा का 25 साल का पैतरा फेल हो जाएगा और गुजरात परिवर्तन का बिगुल बजेगा ओर हो सकता है सत्ता कांग्रेस के हाँथो में आ जाए।
क्यों हार्दिक ने कहा उस समय सहानुभूति के चलते कांग्रेस को मिली थी जीत:-
कांग्रेस को अलविदा कह गए हार्दिक पटेल इस समय सुर्खियों में हैं। हर कोई हार्दिक पटेल के बयानों पर अपनी नजर जमाए बैठे हैं क्योंकि यह इस समय कांग्रेस के खिलाफ आक्रमक रुख अपनाए हुए हैं। वही अब इन्होने कांग्रेस की माधवसिंह सोलंकी के समान दिखने वाली रणनीति पर बयान दिया है और कहा है कि उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के कारण सहानुभूति लहर थी इसी लहर से यह रिकार्ड जीत हुई थी अन्यथा अगले ही चुनाव में खाम थियरी ढेर हो गई थी।

